छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में करीब 11 साल पुराने नक्सली हमले के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोरर थाना क्षेत्र में वर्ष 2015 में सुरक्षा जवानों पर घात लगाकर किए गए हमले के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने नक्सली दंपति प्रभाकर राव और उसकी पत्नी राजे कांगे को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामले में शामिल तीन अन्य आरोपियों को 5-5 साल की सजा दी गई है।
2015 में सर्चिंग पार्टी पर हुआ था हमला
मामला वर्ष 2015 का है। कोरर थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सर्चिंग पार्टी जंगल में गश्त कर रही थी। इसी दौरान नक्सलियों ने जवानों पर घात लगाकर हमला किया था। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और हमले से जुड़े आरोपियों की तलाश शुरू हुई। जांच के दौरान पुलिस के सामने प्रभाकर और राजे कांगे की भूमिका सामने आई। इसके बाद दोनों की गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चलाया गया।
2024 में गिरफ्तार हुआ था प्रभाकर
नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस को वर्ष 2024 में बड़ी सफलता मिली। पुलिस टीम ने प्रभाकर राव को गिरफ्तार किया। इसके कुछ समय बाद उसकी पत्नी राजे कांगे को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पति-पत्नी समेत पांच आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई।

नक्सली दंपति पर था 33 लाख रुपये का इनाम
पुलिस के अनुसार, प्रभाकर राव पर 25 लाख रुपये और राजे कांगे पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों नक्सली संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। पुलिस के मुताबिक, प्रभाकर राव संगठन में एसजेडसीएम और आरसीएम उत्तर सब जोनल ब्यूरो मापोस टीम प्रभारी के पद पर रहा था। वहीं राजे कांगे डीवीसीएम और रावघाट एरिया कमेटी प्रभारी के तौर पर सक्रिय थी।
पुलिस के अनुसार, दोनों करीब 40 वर्षों से नक्सली संगठन में सक्रिय थे। प्रभाकर के खिलाफ अलग-अलग थानों में हत्या, लूट, अपहरण समेत 64 मामले, जबकि राजे कांगे के खिलाफ 36 मामले दर्ज बताए गए हैं। पुलिस ने दोनों पर कई गंभीर नक्सली वारदातों में शामिल होने के आरोप भी लगाए हैं। इनमें थाना प्रभारी और गोपनीय सैनिक की हत्या तथा जनअदालत से जुड़े मामले शामिल हैं।
किस आरोपी को कितनी सजा
प्रभाकर उर्फ बालमुरी नारायण राव
- IPC की धारा 147 के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास।
- UAPA की धारा 38(2) के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास।
- UAPA की धारा 39(2) के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास और अर्थदंड।
राजे कांगे उर्फ मालती उर्फ निर्मला
- IPC की धारा 147 के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास।
- UAPA की धारा 38(2) के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास।
- UAPA की धारा 39(2) के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास।
चिंतूराम ताम्रकार
- IPC की धारा 212 के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास।
- UAPA की धारा 19 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास।
रमेश कुमार कुमेटी
- IPC की धारा 212 के तहत 2 वर्ष का कारावास।
- UAPA की धारा 19 के तहत 5 वर्ष का कारावास।
श्यामनाथ उसेंडी
- IPC की धारा 212 के तहत 2 वर्ष का कारावास।
- UAPA की धारा 19 के तहत 5 वर्ष का कारावास और अर्थदंड।
नक्सल विरोधी अभियान के बीच फैसला अहम
बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी अभियान तेज होने के बीच इस पुराने मामले में अदालत का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, नक्सली संगठन में उच्च स्तर की जिम्मेदारी निभाने वाले किसी नेता को अदालत से सजा मिलने का यह अहम मामला है।
