सितंबर में संक्रमित हुए 50 से ज्यादा लोग दोबारा पाॅजिटिव, शरीर में डेड वायरस रहने या एंटीबाॅडी कम होने से बढ़ा खतरा

राजधानी में सितंबर-अक्टूबर में कोरोना संक्रमित हुए लोग दोबारा पॉजिटिव आ गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने से ऐसा हो सकता है। इन्हें रिपीट केस के बजाए री-इंफेक्शन माना जाएगा, क्योंकि ऐसे लोग ठीक होने के चार-पांच माह बाद दोबारा संक्रमित हुए हैं।

डाक्टरों का कहना है कि ठीक होने के बाद भी किसी व्यक्ति के शरीर में कोरोना के डेड वायरस रह सकते हैं। इनकी वजह से कोई व्यक्ति तीन माह के भीतर दोबारा संक्रमित भी हो सकता है। भास्कर ने विशेषज्ञों से बात की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इन दिनों जो पॉजिटिव आ रहे हैं, इसमें ऐसे भी लोग हैं, जो पीक के दौरान संक्रमित हुए थे।

दोबारा संक्रमण से विशेषज्ञ हैरान तो नहीं है, लेकिन यह मामला विशेष केस में आ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई रिसर्च बताती है कि कोरोना के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी तीन माह तक रह सकती है।

इसके बाद एंटीबॉडी घट सकती है। इससे संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ होने के बाद फिर पाजिटिव हो सकता है। दोबारा संक्रमण कितना खतरनाक है, ये मरीज के स्वास्थ्य पर निर्भर है। मसलन वह दूसरी बीमारियों से ग्रसित है तो उसे खास सावधानी बरतनी होगी। पहले भी कुछ अफसर, डॉक्टर व डीआईजी तीन माह के भीतर दोबारा संक्रमित हुए थे। उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इलाज के बाद वे स्वस्थ भी हो गए।

एक ही परिवार के कई सदस्य हो रहे संक्रमित
इन दिनों एक ही परिवार के कई सदस्य संक्रमित हो रहे हैं। रोजाना राजधानी में ऐसे 5 से ज्यादा परिवार सामने आ रहे हैं, जिनमें एक साथ पांच-पांच सदस्य पाजिटिव निकल रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के एक डाॅक्टर का पूरा परिवार संक्रमित हो गया। सीनियर गेस्ट्रो सर्जन डॉ. देवेंद्र नायक व फिजिशियन डॉ. अब्बास नकवी के अनुसार केस बढ़ रहे हैं, इसमें लोगों की लापरवाही जिम्मेदार है।

एंटीबॉडी कम, इसलिए संक्रमित
“कुछ रिसर्च में यह बात आ गई है कि शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी तीन माह बाद कम हो सकती है। ऐसे में कोई भी स्वस्थ व्यक्ति दोबारा संक्रमित हो सकता है।”
-डॉ. आरके पंडा, सदस्य कोरोना कोर कमेटी