जल संसाधन विभाग से रिटायर्ड 84 साल के इकबाल बाला की मौत 16 अप्रैल को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में बने कोविड अस्पताल में हो गई थी। परिवार को इसकी जानकारी 10 दिन बाद मंगलवार को मिली। नगर निगम की मदद से इस्लामिक रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इकबाल के भाई बहन, पाकिस्तान और अमेरिका में रहते हैं। शांति नगर के रहने वाले डॉ. अंकुर गुप्ता को वो अपने पोते की तरह मानते थे, गुप्ता परिवार के साथ ही रहते थे। डॉ अंकुर ने ही अपने दादा इकबाल को मौदहापारा स्थित कब्रिस्तान में आखिरी सलाम किया, वीडियो कॉल पर उनके विदेशों में रहने वाले परिजनों ने भी नम आंखें से विदाई दी। मगर दूसरी तरफ बीते 10 दिनों में बुजुर्ग इकबाल बाला और अंकुर गुप्ता के परिवार के साथ जो हुआ, वो भयावह विडंबना है।
पूरा परिवार हुआ कोरोना पॉजिटिव, दो और सदस्यों की मौत
इकबाल बाला जल संशाधन विभाग में अपने सहयोगी अरुण गुप्ता के साथ काम करते थे। कुछ वक्त लिए इकबाल अभनपुर में रहने लगे। मगर साल 2017 के बाद वो अरुण गुप्ता के बेटे डॉ. अंकुर के साथ रहने लगे। इंसानियत के इस खूबसूरत रिश्ते में कभी मजहब आड़े नहीं आया। मगर कोरोना की इस त्रासदी की वजह से गुप्ता परिवार ने जो झेला वो बेहद दुखद है। गुप्ता परिवार के स्व. इकबाल बाला समेत 5 लोग कोरोना से संक्रमित हो गए थे। सभी का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा था। इस बीच परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई।
अखबार के इश्तेहार से पता लगा
स्टेडियम में बने अस्पताल में निधन के बाद इकबाल बाला का शव अंबेडकर अस्पताल की मॉर्चरी में रखवा दिया गया। उनकी मौत की खबर परिजनों तक नहीं पहुंची थी। पहले ही परिवार के दो सदस्यों की मौत की वजह से गुप्ता परिवार परेशानी में था। जब घर वालों ने स्टेडियम के अस्पताल में बुजुर्ग इकबाल को लेकर संपर्क किया तो वहां से कोई जानकारी नहीं मिल पाई। जबकि नगर निगम का दावा है कि अफसर खुद इकबाल बाला के परिजनों को खोज रहे थे। नगर निगम ने जब इकबाल बाला की मौत की जानकारी अखबार में इश्तेहार के तौर पर छापी तो गुप्ता परिवार ने अफसरों से संपर्क किया और फिर बूढ़ापारा निवासी समाज सेवी मो. ताहिर की मदद से उनका अंतिम संस्कार हो सका।

