कर्नाटक में कांग्रेस का कमाल, जीत में छिपा है ‘छत्तीसगढ़ मॉडल‘

मुख्यधारा @ कर्नाटक

कर्नाटक में कांग्रेस ने कमाल किया। पिछले विधानसभा चुनाव में जीती 80 सीटों को पार्टी ने इस बार 136 तक पहुंचा दिया है। इसके साथ ही उसने भारतीय जनता पार्टी से एक और राज्य छीन लिया। इससे पहले हिमाचल में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर सरकार बनाई थी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कर्नाटक चुनाव में पार्टी के स्टार प्रचारक थे। उन्होंने वहां सभा ली, बैठकें कीं, लेकिन सबसे अहम रही। इस जीत के पीछे छिपा है ‘छत्तीसगढ़ मॉडल‘ फ्री बिजली, ओल्ड पेंशन से लेकर गोबर खरीदी तक का वादा

यदि कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र को देखा जाए तो ऐसा क्यों कहा जा रहा है यह बिलकुल साफ हो जाता है। पार्टी ने जिस तरह हिमाचल प्रदेश में छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं को वहां प्रचारित कर और उसके वादे कर चुनाव में सफलता पाई थी ठीक वैसा ही कर्नाटक में भी किया गया। एक नजर डालते हैं, कर्नाटक कांग्रेस के घोषणा पत्र और छत्तीसगढ़ में चल रही योजनाओं पर…

1.हर घर के लिए 200 यूनिट बिजली फ्री ( छत्तीसगढ़ में पहले से बिजली बिल हॉफ योजना चल रही है, यहां 400 यूनिट तक बिजली खपत पर आधा बिल माफ है)

2.ग्रेजुएट बेरोजगार को 3 हजार रुपए महीने बेरोजगारी भत्ता ( यहां इसी साल से बेरोजगार युवाओं को 2500 रुपए बेरोजगारी भत्ता देने की शुरुआत की गई है)

3.हर परिवार को 10 किलो चावल फ्री ( छत्तीसगढ़ में हर परिवार को 35 किलो चावल फ्री देने की योजना पहले से जारी है)

4.ओल्ड पेंशन योजना लागू करने की घोषणा ( छत्तीसगढ़ ने ओल्ड पेंशन योजना लागू कर दी है और 90 फीसदी से ज्यादा सरकारी कर्मचारी इसमें आ गए हैं)

5.3 रुपए किलो में गोबर खरीदने का वादा ( छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के तहत गौ पालकों से 2 रुपए किलो में गोबर खरीदा जा रहा है)

6.परिवार की महिला मुखिया को 2 हजार रुपए प्रति माह देने का वादा ( छत्तीसगढ़ में सीधे ऐसी योजना नहीं है, लेकिन इसी साल शक्ति स्वरूपा योजना लागू की जा रही है, जिसमें महिलाओं को 30 हजार तक मदद दी जाएगी)

कर्नाटक कांग्रेस के घोषणा पत्र में यह योजनाएं सीधे तौर हमारे प्रदेश से ली गईं। कांग्रेस ने देखा कि ओल्ड पेंशन योजना के वादे पर हिमाचल में पार्टी को जबरदस्त सफलता मिली, लिहाजा इसे यहां भी जोड़ दिया गया। चुनावी नतीजों से जाहिर है कि कांग्रेस के छत्तीसगढ़ मॉडल को लगातार दूसरे राज्य में भी जनता ने स्वीकार कर लिया।

 

 

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