मुंबई। राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे छात्र आंदोलनों और NEET पेपर लीक विवाद के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने 26 जुलाई को मुंबई में संयुक्त मोर्चा निकालने की घोषणा की है। दोनों नेताओं का कहना है कि यह मार्च छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं को आवाज देने तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया जाएगा।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है।
26 जुलाई को शिवाजी पार्क से सिद्धिविनायक मंदिर तक निकलेगा मोर्चा
राज ठाकरे ने बताया कि प्रस्तावित मोर्चा मुंबई के शिवाजी पार्क से शुरू होकर प्रभादेवी स्थित सिद्धिविनायक मंदिर तक जाएगा। उन्होंने कहा कि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा और इसमें किसी भी राजनीतिक दल का झंडा नहीं लगाया जाएगा। उनका दावा है कि यह आंदोलन किसी दल विशेष का नहीं बल्कि छात्रों और अभिभावकों की आवाज को मजबूत करने का प्रयास है।
राज ठाकरे ने कहा कि आंदोलन के दौरान यदि किसी ने शांतिपूर्ण मार्च में बाधा डालने की कोशिश की तो उसका कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार यदि समय रहते छात्रों से संवाद करती, तो मामला इतना आगे नहीं बढ़ता।
उद्धव ठाकरे बोले- छात्र अब डरने वाले नहीं
उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरकार छात्रों की भावनाओं को समझने में असफल रही है। उनके अनुसार, देशभर में युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया और कई छात्रों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। उद्धव ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को दबाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रदर्शन को लेकर उनकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी चर्चा हुई है और कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के नेता भी इस मोर्चे में शामिल होंगे।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
दोनों नेताओं ने कहा कि छात्रों की मुख्य मांग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियां सामने आती हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया था। उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर संदेश देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सरकार को छात्रों के साथ सीधे संवाद करना चाहिए।
देशभर में जारी हैं छात्र आंदोलन
NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और कथित पेपर लीक के बाद देश के कई राज्यों में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली सहित विभिन्न शहरों में विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र में प्रस्तावित यह संयुक्त मोर्चा छात्र आंदोलन को नया राजनीतिक समर्थन देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे किसी सार्वजनिक मुद्दे पर एक मंच पर दिखाई दे रहे हैं, जिससे इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक हलकों में भी काफी चर्चा है।
