भड़के सोनम वांगचुक, बोले- 26 दिन के त्याग के बाद भी क्या चरित्र प्रमाण पत्र देना पड़ेगा?

भड़के सोनम वांगचुक, बोले- 26 दिन के त्याग के बाद भी क्या चरित्र प्रमाण पत्र देना पड़ेगा?

 NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में 26 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार से समझौता करने के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अनशन समाप्त करने के बाद सोशल मीडिया पर उठे सवालों और राजनीतिक आरोपों के बीच वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि लगभग एक महीने तक छात्रों के लिए संघर्ष करने और अपने स्वास्थ्य की कीमत चुकाने के बाद भी यदि उन्हें अपनी नीयत और ईमानदारी साबित करनी पड़ रही है, तो यह बेहद दुखद है।

वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने छात्रों के भविष्य के लिए 26 दिन तक उपवास रखा, इस दौरान उनका करीब 11 किलोग्राम वजन कम हो गया और उन्होंने गंभीर शारीरिक कठिनाइयों का सामना किया।

छात्रों के लिए 26 दिनों तक उपवास रखने, 11 किलो वजन कम होने और इतनी कठिन परिस्थितियों से गुजरने के बाद भी क्या मुझे यह साबित करना पड़ेगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था, मैंने किसके हाथों जूस पीकर इसे तोड़ा और क्या मैंने कोई समझौता किया?

उन्होंने आरोप लगाने वालों से अपील की कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे घटनाक्रम और परिस्थितियों को समझें।

राजनीतिक आरोपों पर जताई नाराजगी

वांगचुक ने कहा कि उनके अनशन को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की बात पर भरोसा करने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह निष्पक्ष है या किसी राजनीतिक दल से प्रभावित होकर बयान दे रहा है।

यदि कोई निष्पक्ष व्यक्ति है तो उसकी बात जरूर सुनिए, लेकिन राजनीतिक द्वेष रखने वालों की बातों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।

डील के आरोपों के बाद आया बयान

सोनम वांगचुक ने 23 जुलाई की रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में जूस पीकर अपना 26 दिन पुराना अनशन समाप्त किया था। इसके बाद कुछ राजनीतिक नेताओं और सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उन पर सरकार से समझौता करने के आरोप लगाए।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद सहित कुछ नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद वांगचुक ने सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी।

पत्नी ने भी किया बचाव

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने भी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोगों को राजनीतिक निष्कर्ष निकालने से पहले यह समझना चाहिए कि इस आंदोलन की व्यक्तिगत कीमत कितनी बड़ी रही है।

उन्होंने कहा कि वांगचुक आईसीयू में भर्ती हैं और 26 दिन के उपवास के कारण उनका करीब 11 किलोग्राम वजन कम हो चुका है, जिसमें मांसपेशियों का वजन भी शामिल है। उनके अनुसार, यह त्याग किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि छात्रों के हित में किया गया।

CJP का आंदोलन जारी

हालांकि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और अन्य मांगों को लेकर उसका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो देशभर में व्यापक प्रदर्शन किए जाएंगे।

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