11.38 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई, कंपनी डायरेक्टर समेत कई पर FIR दर्ज

11.38 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई, कंपनी डायरेक्टर समेत कई पर FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में कारोबारी राजकुमार सराफ के ठिकानों पर हुई कार्रवाई को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती तौर पर इसे ED की रेड माना जा रहा था, लेकिन FIR के अनुसार यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने की है। मामले में आयकर विभाग (IT) ने भी कार्रवाई की है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर CBI ने 11.38 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले में धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके डायरेक्टरों, गारंटर, अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

क्या है पूरा मामला?

CBI के मुताबिक आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से बैंक से प्राप्त लोन राशि का निर्धारित उद्देश्य के बजाय गलत तरीके से उपयोग किया। जांच में आरोप है कि कैश क्रेडिट लिमिट की राशि का इस्तेमाल पैकिंग क्रेडिट लोन चुकाने के लिए किया गया, जिससे बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

बॉक्साइट कारोबार के लिए लिया था लोन

धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड बॉक्साइट की बिक्री और निर्यात का कारोबार करती थी। कंपनी के साथ KSR इंफ्रा और केपेक्स-2 एंटरप्राइजेज नाम की दो अन्य फर्में भी संचालित की जा रही थीं। इन्हीं व्यावसायिक गतिविधियों के लिए यूनियन बैंक से लोन लिया गया था।

2024 में NPA हुआ खाता

बैंक के अनुसार कंपनी समय पर कर्ज नहीं चुका सकी, जिसके बाद 12 अक्टूबर 2024 को उसका लोन खाता NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया। 31 जनवरी 2026 तक बैंक का बकाया 11.38 करोड़ रुपये हो गया।

किन धाराओं में मामला दर्ज?

आरोपियों के खिलाफ IPC की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग, लेखा में हेराफेरी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और धारा 13(2) सहपठित 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

CBI करेगी वित्तीय लेन-देन की जांच

CBI का कहना है कि शुरुआती जांच में बैंक के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और लोन राशि के दुरुपयोग के पर्याप्त आधार मिले हैं। अब एजेंसी सभी वित्तीय लेन-देन, संबंधित कंपनियों, बैंक अधिकारियों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी।

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