हरेली पर इस बार स्वार्थ सिद्धि का भी संयोग

छग का पारंपरिक त्यौहार हरेली 20 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग, पुनर्वसु नक्षत्र, श्रावण सोमवार, सोमवती अमावस्या और स्नान दान श्रावण अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। इससे पर्व की शुभता बढ़ेगी। इसी दिन दीप पूजा भी की जाएगी। यह पर्व खेतों में खड़ी फसल अच्छी उगे, किसान खुशहाल रहे, इसी कामना के साथ किसान खेत-खलियान में काम आने वाले औजार हल, हंसिया आदि की पूजा-अर्चना करेंगे। इस बार खेत-खलियानों में पूजा से लेकर शहर के मंदिरों में शिव-भक्ति का नजारा दिखाई देगा। क्योंकि हरेली सावन के सोमवार को पड़ रहा है। एक तरफ किसान खेतों में पूजा करेंगे तो वहीं शहर के शिव मंदिरों में श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। इस बार हरेली का त्यौहार सोमवार यानी सोमवती अमावस्या को है।
हरेली पर्व को लेकर किसान तैयारियाँ में जुट गए है। पुजारी पं. हेमंत द्विवेदी के अनुसार 16 साल बाद सावन महीना में सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। 20 साल पहले सन्‌ 2000 में सोमवती अमावस्या थी। इसके बाद 2004 में सावन महीने को पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के रूप में मनाया गया था, यानी उस साल दो बार सावन महीना पड़ा था। दूसरे सावन महीने में सोमवती अमावस्या का संयोग बना था।
20 को मनाएंगे हरेली और अमावस्या
इस साल 2020 में 20 जुलाई को छत्तीसगढ़ का हरेली पर्व मनाया जाएगा। इसे देशभर में हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सोमवती अमावस्या पर पुनर्वसु नक्षत्र के बाद रात्रि में 9.22 बजे से पुष्य नक्षत्र रहेगा। सोमवार को यदि पुष्य नक्षत्र रहे तो उसे सोम पुष्य कहते हैं। रात्रि में सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। सावन महीने में पड़ रही सोमवती अमावस्या पर भगवान भोलेनाथ के साथ ही पितृ पूजा करने से पितृ दोष दूर होने की मान्यता है। जाने-अनजाने में जो गलती हो, उसके लिए पितरों से क्षमा मांगनी चाहिए। साथ ही सूर्यदेव को जल अर्पण करके तुलसी पौधे की 108 परिक्रमा करनी चाहिए।

सालों में एक बार आती है सोमवती अमावस्या
हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने एक अमावस्या आती है परंतु सोमवार के दिन अमावस्या तिथि का संयोग सालों में कभी कभार बनता है। यह संयोग स्नान, दान के लिए शुभ और सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन नदियों, तीर्थों में स्नान, गोदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र दान करना पुण्य फलदायी माना जाता है।

किसान हल और कृषि के औजारों की पूजा करेंगे
हरेली किसानों का त्योहार है जिसे वह अपने दवारा इस्तेमाल में लाई जाने वाली हल, बैल, और तरह तरह के औजार नांगर, कुदारी, फावड़ा सहित जो खेती बाड़ी में काम आते हैं उसकी पूजा करते हैं। इस दिन बैलों की पूजा अर्चनाकर उसे जंगल से लाए औषधी वाले पत्ते खिलाते हैं।