रायपुर। रायपुर के बूढ़ातालाब में उनकी प्रतिमा स्थापित करने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना द़वारा कांसा दान करने की अपील की गयी थी। बूढ़ादेव आदिवासी समाज के अराध्य देव हैं। बूढ़ादेव को मानने वाले लोग प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों से अपने अपने घरों में रखे पुराने और नये कांसे के बर्तनों को लेकर यहां पहुंचे और उसका दान किये। देखते ही देखते यहां बर्तनों का ढ़ेर लग गया। इन बर्तनों को गला कर करीब 75 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया जायेगा।
रायपुर का यह विशाल तालाब बूढ़ादेव के नाम पर ही बूढ़ातालाब रखा गया है। विवेकानंद जी इस तालाब में बचपन में नहाया करते थे इसलिए इसे विवेकानंद सरोवर के नाम से भी जाना जाता है किन्तु बूढ़ातालाब ही ज्यादा प्रचलित नाम है।
वरिष्ठ छायाकार गोकुल सोनी ने बताया कि- दान में मिले बर्तनों के ढ़ेर में आज से पचास और सौ साल पहले उपयोग किये जा रहे कांसे के बर्तन रखे हुए हैं। नये और पुरानी पीढ़ी के लोग इन बर्तनों को देखते ही रह गये। फूलकांस की थाली, माली, सईकमा, लोटा, चरू, गिलास, बटलोही ( ये सब छत्तीसगढ़ी नाम हैं ) सहित अनेक ऐसे बर्तन जो अब देखने को भी नहीं मिलते वे सब इस बर्तन के ढेर में रखे हुए थे।

