प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए सख्त कानून का छत्तीसगढ़ में स्वागत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश भाजपा नेताओं ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी कानून का समर्थन करते हुए इसे युवाओं के हित में जरूरी बताया, लेकिन साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई।
CM साय बोले- परीक्षा प्रणाली होगी पारदर्शी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पेपर लीक और नकल विरोधी यह सख्त कानून देश और राज्य की परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी।
भाजपा ने बताया ऐतिहासिक फैसला
प्रदेश भाजपा नेताओं ने कहा कि पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाने के लिए 10 साल तक की सजा, ₹10 करोड़ तक के जुर्माने और फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था एक ऐतिहासिक निर्णय है। उनका कहना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगेगी और युवाओं का भरोसा मजबूत होगा।
छत्तीसगढ़ में पहले से लागू है सख्त कानून
भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में पहले ही कदम उठा चुकी है। राज्य विधानसभा ने मार्च 2026 में ‘छत्तीसगढ़ लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक, 2026’ पारित किया था। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य की नीतियां सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक-दूसरे के पूरक हैं।
चरणदास महंत ने रखा संतुलित पक्ष
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस विधेयक पर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को न्याय दिलाने और गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए सख्त राष्ट्रीय कानून जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग
डॉ. महंत ने कहा कि केवल कड़े कानून बना देना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को परीक्षाएं आयोजित कराने वाली सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही भी तय करनी चाहिए, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
