केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में यह विधेयक पेश किया। हालांकि, बिल पेश होने के कुछ ही मिनट बाद विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही रोकनी पड़ेगी |
पेपर लीक पर सख्त होगी कानूनी कार्रवाई
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और अन्य अनुचित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है। नए प्रावधानों के तहत दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
मुख्य प्रावधानों में शामिल हैं:
- पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी पर 10 साल तक की जेल।
- ₹10 करोड़ तक का जुर्माना।
- दोषियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान।
- मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें।
- तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में पेश हुआ बिल
यह विधेयक केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा हाल ही में मंजूरी मिलने के बाद संसद में पेश किया गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और युवाओं का भरोसा कायम रखने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था जरूरी है।
पीएम मोदी ने किया था सख्त कानून का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए संसद में व्यापक कानून लाने की घोषणा की थी। इसी क्रम में यह संशोधन विधेयक पेश किया गया है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स के गठन की भी घोषणा की है। इस टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आगे और सुधार किए जाएंगे।
विपक्ष से सहयोग की अपील
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि छात्रों की चिंता को देखते हुए सरकार यह महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि हंगामे के बजाय इस विषय पर संसद में गंभीर और खुली चर्चा हो तथा सभी दल मिलकर इस कानून को पारित करने में सहयोग करें।
