अब यूरिया पर निर्भरता होगी कम,सरकार ने 82% नाइट्रोजन वाली नई खाद को दी मंजूरी

अब यूरिया पर निर्भरता होगी कम,सरकार ने 82% नाइट्रोजन वाली नई खाद को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने उर्वरक आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को नए विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 82 प्रतिशत नाइट्रोजन युक्त एनहाइड्रस अमोनिया (Anhydrous Ammonia) के उपयोग को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ भारत खेती में सीधे एनहाइड्रस अमोनिया के इस्तेमाल की अनुमति देने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। सरकार का मानना है कि इससे यूरिया की उपलब्धता बेहतर होगी, आयात पर खर्च कम होगा और घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

तीन साल के लिए उत्पादन की अनुमति

23 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने फर्टिलाइजर (इनऑर्गेनिक, ऑर्गेनिक या मिक्स्ड) कंट्रोल ऑर्डर, 1985 के तहत पात्र इकाइयों को तीन वर्षों तक एनहाइड्रस अमोनिया उर्वरक का उत्पादन करने की अनुमति दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस उर्वरक में वजन के आधार पर कम से कम 82 प्रतिशत नाइट्रोजन होना अनिवार्य होगा।

भारत बना दुनिया का चौथा देश

उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, यदि यह योजना सफल रहती है तो भारत खेती में सीधे एनहाइड्रस अमोनिया का उपयोग करने वाला दुनिया का चौथा देश होगा। इससे पहले अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

यूरिया और एनहाइड्रस अमोनिया में क्या अंतर है?

विशेषज्ञों के अनुसार, यूरिया और एनहाइड्रस अमोनिया दोनों ही नाइट्रोजन आधारित उर्वरक हैं, लेकिन इनके उपयोग का तरीका अलग है। यूरिया को सामान्य रूप से खेतों में छिड़का जाता है, जबकि एनहाइड्रस अमोनिया गैस के रूप में होता है और इसे विशेष उपकरणों की मदद से मिट्टी के अंदर इंजेक्ट करना पड़ता है। इसके लिए विशेष भंडारण टैंक, परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होती है।

अतिरिक्त अमोनिया के उपयोग को मिलेगा बढ़ावा

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि कई यूरिया संयंत्र हर वर्ष अतिरिक्त अमोनिया का उत्पादन करते हैं, जिसे उत्पादन क्षमता की सीमाओं के कारण यूरिया में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। सरकार ने ऐसे अतिरिक्त अमोनिया के उपयोग को बढ़ावा देने और जटिल उर्वरक (NPK) इकाइयों को इसकी आपूर्ति में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

यूरिया की बढ़ती मांग के बीच अहम फैसला

मानसून के दौरान बुवाई के मौसम में यूरिया की मांग तेजी से बढ़ जाती है। हालिया बारिश के बाद जुलाई के पहले पखवाड़े में ही यूरिया की 60 प्रतिशत से अधिक मांग पूरी हो चुकी थी। भारत हर साल लगभग 100 लाख टन यूरिया आयात करता है, जबकि घरेलू स्तर पर करीब 300 लाख टन यूरिया का उत्पादन होता है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि एनहाइड्रस अमोनिया के उपयोग से आयात पर निर्भरता कम होगी और उर्वरक क्षेत्र अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।

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