अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ी 10 हैरान करने वाली बातें

अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ी 10 हैरान करने वाली बातें

भारत के शुभांशु शुक्ला तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के मिशन पर रवाना हुए हैं। Axiom-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री करीब 14 दिन ISS पर बिताएंगे। पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर मौजूद यह अंतरिक्ष स्टेशन वैज्ञानिक प्रयोगों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक अनोखा केंद्र है। ISS को लेकर लोगों के मन में हमेशा से उत्सुकता रही है। आखिर अंतरिक्ष यात्री यहां कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं और सोते कैसे हैं? आइए जानते हैं इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जुड़ी 10 खास बातें।

1. क्या है ISS और कब हुआ था इसका निर्माण

ISS यानी International Space Station पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित एक मॉड्यूलर और रहने योग्य अंतरिक्ष स्टेशन है। यह कई देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के सहयोग से तैयार किया गया है। NASA, Roscosmos, JAXA, ESA और CSA इसके प्रमुख भागीदार हैं। ISS के पहले मॉड्यूल को 20 नवंबर 1998 को लॉन्च किया गया था। इसके बाद समय-समय पर इसमें नए मॉड्यूल और सुविधाएं जोड़ी जाती रही हैं।

2. पृथ्वी से कितनी ऊंचाई पर है ISS?

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी से औसतन करीब 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा करता है। साफ आसमान में इसे कई बार पृथ्वी से भी देखा जा सकता है और यह रात के आकाश में चमकती हुई वस्तु की तरह नजर आता है।

3. फुटबॉल मैदान जितना बड़ा है ISS

ISS का आकार काफी विशाल है। इसके सौर पैनलों समेत इसकी चौड़ाई करीब 109 मीटर है। इसका रहने योग्य आयतन करीब 388 घन मीटर बताया गया है। स्टेशन में अंतरिक्ष यात्रियों के रहने और काम करने के लिए प्रयोगशालाएं, सोने की जगह, व्यायाम की सुविधा, शौचालय और भोजन तैयार करने की व्यवस्था मौजूद है।

4. ISS पर 90 मिनट में एक चक्कर पूरा होता है

ISS पृथ्वी के चारों ओर करीब 28,163 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूमता है। इस वजह से यह लगभग 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है। इसका नतीजा यह है कि ISS पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को 24 घंटे के दौरान करीब 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त दिखाई दे सकते हैं।

5. ISS पर अंतरिक्ष यात्री कैसे रहते हैं

ISS पर माइक्रोग्रैविटी यानी सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण का वातावरण होता है। ऐसे में अंतरिक्ष यात्री सामान्य तरीके से जमीन पर खड़े नहीं रह सकते और अक्सर तैरते हुए नजर आते हैं। अपने दैनिक काम के दौरान उन्हें स्टेशन के अंदर खुद को स्थिर रखने के लिए विभिन्न जगहों पर मौजूद पकड़ और बंधने की व्यवस्था का इस्तेमाल करना पड़ता है। उनका दिन वैज्ञानिक प्रयोगों, स्टेशन के रखरखाव और व्यायाम जैसी गतिविधियों में गुजरता है।

6. अंतरिक्ष में खाना और सोना कैसे होता है

ISS पर भोजन विशेष तरीके से पैक किया जाता है। कई खाद्य पदार्थों को निर्जलित रूप में रखा जाता है और जरूरत के मुताबिक उनमें पानी मिलाया जाता है। सोने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों के पास विशेष स्लीपिंग बैग होते हैं। इन्हें स्टेशन की दीवार से सुरक्षित किया जाता है, ताकि माइक्रोग्रैविटी में अंतरिक्ष यात्री तैरते हुए इधर-उधर न चले जाएं।

7. क्या ISS पर नहाना संभव है

ISS पर पृथ्वी की तरह सामान्य तरीके से नहाना संभव नहीं है। माइक्रोग्रैविटी में पानी के स्वतंत्र रूप से फैलने की समस्या होती है और अंतरिक्ष में पानी बेहद कीमती संसाधन है। इसलिए अंतरिक्ष यात्री शरीर की सफाई के लिए स्पंज और विशेष नो-रिंस शैंपू व साबुन जैसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं।

8. पसीने और मूत्र से पानी कैसे बनाया जाता है

अंतरिक्ष में पानी की आपूर्ति सीमित होती है और पृथ्वी से लगातार पानी भेजना महंगा और मुश्किल है। इसलिए ISS पर पानी को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए उन्नत जल पुनर्प्राप्ति प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में पसीने, मूत्र और हवा में मौजूद नमी से प्राप्त पानी को साफ करके दोबारा उपयोग योग्य बनाया जाता है।

9. ISS पर किस तरह के प्रयोग होते हैं

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन एक बड़ी वैज्ञानिक प्रयोगशाला की तरह काम करता है। यहां माइक्रोग्रैविटी के प्रभावों को समझने के लिए जीव विज्ञान, भौतिकी, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और मौसम विज्ञान समेत कई क्षेत्रों में प्रयोग किए जाते हैं। इन अध्ययनों से पृथ्वी पर जीवन से जुड़ी तकनीकों को समझने और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी में मदद मिलती है।

10. ISS का भविष्य है

ISS को 2030 तक संचालित करने की योजना बताई गई है। इसके बाद इसे नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कराया जाएगा और इसके अवशेष प्रशांत महासागर के निर्धारित क्षेत्र में गिराए जाने की योजना है। इसके बाद निजी और व्यावसायिक अंतरिक्ष स्टेशनों की भूमिका बढ़ने की उम्मीद है। इससे अंतरिक्ष में लंबे समय तक मानव गतिविधियों को जारी रखने का रास्ता खुल सकता है।

अंतरिक्ष में मानव सहयोग की बड़ी मिसाल है ISS

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन केवल अंतरिक्ष यात्रियों के रहने की जगह नहीं है। यह वैज्ञानिक अनुसंधान और कई देशों के बीच सहयोग का एक बड़ा उदाहरण है। शुभांशु शुक्ला का Axiom-4 मिशन भी भारत के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

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