लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि सिर और गर्दन का कैंसर केवल तंबाकू खाने या सिगरेट पीने वाले लोगों को होता है। लेकिन अब डॉक्टरों का कहना है कि यह धारणा तेजी से बदल रही है। हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कम उम्र के लोगों को भी सिर और गर्दन का कैंसर हुआ, जबकि उन्होंने कभी तंबाकू या सिगरेट का सेवन नहीं किया था। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, वायरल संक्रमण और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी इस बीमारी का जोखिम बढ़ा सकती है।
बदल रही है सिर और गर्दन के कैंसर की तस्वीर
यशोदा मेडिसिटी के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (हेड एंड नेक) विशेषज्ञ डॉ. सुमंत बोलू के अनुसार अब ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनकी उम्र कम है और जिन्होंने कभी धूम्रपान या तंबाकू का सेवन नहीं किया। डॉक्टर का कहना है कि इसके पीछे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण, असंतुलित खानपान, फास्ट फूड, नींद की कमी और कमजोर इम्यून सिस्टम जैसे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि युवा अक्सर शुरुआती लक्षणों को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डॉक्टरों के मुताबिक यदि नीचे दिए गए लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए—
- मुंह में लगातार रहने वाला छाला
- आवाज में लंबे समय तक बदलाव
- निगलने में परेशानी
- गर्दन में गांठ महसूस होना
- जीभ पर सफेद या लाल धब्बे
- लगातार गले में खराश
समय पर जांच कराने से बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है, जिससे इलाज की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
ये आदतें भी बढ़ा सकती हैं कैंसर का खतरा
शारदाकेयर हेल्थसिटी के डायरेक्टर एवं सीनियर कंसल्टेंट (क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी) डॉ. अनिल ठकवानी के अनुसार सिर और गर्दन के कैंसर के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
इनमें शामिल हैं—
- लंबे समय तक खराब ओरल हाइजीन
- दांतों की नियमित देखभाल न करना
- बार-बार होने वाले संक्रमण
- प्रदूषण के लगातार संपर्क में रहना
- आनुवंशिक कारण
डॉक्टर बताते हैं कि कई लोग महीनों तक घरेलू उपचार करते रहते हैं और विशेषज्ञ के पास तब पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता सबसे जरूरी है। नियमित डेंटल चेकअप, अच्छी मौखिक स्वच्छता, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
यदि मुंह का कोई छाला, गले की समस्या या गर्दन में सूजन दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। कम उम्र के लोगों में बढ़ते मामलों को देखते हुए अब केवल हाई-रिस्क लोगों ही नहीं, बल्कि युवाओं में भी कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
