कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन में मंदिर और मस्जिद में लोगों के जाने पर रोक का फैसला रखा गया था लेकिन ईद के नजदीक आते ही मस्जिद में नमाज अदा करने की मांग उठती रही। राज्य के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने ईद के मौके पर खुद को सामूहिक नमाज अदा करने से रोक दिया है। केवल 4 से 5 लोग ही मस्जिदों और ईदगाह पर नमाज अदा करेंगे। कोरोना वायरस के डर से यह निर्णय किया गया है।
IANS न्यूज एजेंसी से बात करते हुए नवाब मलिक ने कहा कि लोगों ने शब-ए-बारात और शब-ए-क़द्र में खुद को संयमित रखा और अब ईद पर भी इसी तरह का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि केवल सीमित संख्या में लोग मस्जिदों और ईदगाहों पर नमाज़ अदा करने की मंजूरी दी गई है और बाकी लोग घर पर नमाज़ अदा करने के लिए कहा गया है।
उन्होंने कहा कहा कि लोगों ने खुद फैसला किया है और सरकार की ओर से कोई दबाव नहीं बनाया गया है। धर्मगुरुओं ने समुदाय के लोगों से कहा है कि वे घर पर कैसे नमाज अदा कर सकते हैं। इसलिए 4 से 5 लोग मस्जिद या ईदगाह में नमाज अदा करने के लिए आ सकते हैं।
महाराष्ट्र में देश में सबसे ज्यादा कोरोनो वायरस के मामले हैं और इसलिए राज्य सरकार ईद से पहले समुदाय के नेताओं से बात कर रही है ताकि नमाज के लिए ज्यादा लोग मस्जिद में ना जुटे।
मुंबई में मालवानी में शिया संप्रदाय का नेतृत्व करने वाले मौलाना अशरफ इमाम ने कहा है कि मार्च में लॉकडाउन की घोषणा से पहले मस्जिद के बाहर एक नोटिस लगाया गया था जिसमें नमाज पर प्रतिबंध लगाया गया था। उन्होंने कहा कि हमने नमाज पर रोक लगा रखी है और सरकार की एसओपी का पालन कर रहे हैं।
देश भर में सोमवार को ईद मनाई जाएगी क्योंकि शनिवार को चांद नहीं देखा गया था।

