छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में सड़कों और हाईवे पर बेसहारा मवेशियों की मौजूदगी लगातार हादसों का कारण बन रही है। रविवार देर रात हल्दी वार्ड स्थित शिवनाथ नदी के पुल पर तेज रफ्तार वाहन ने सड़क पर बैठे सात मवेशियों को कुचल दिया, जिससे सभी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद उनके अवशेष सड़क पर बिखर गए। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, पिछले एक महीने में हाईवे पर सड़क हादसों में 60 से ज्यादा गोवंश की मौत हो चुकी है। लगातार हो रहे हादसों ने मवेशियों की सुरक्षा के साथ-साथ सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
धान की फसल के कारण शहर की ओर आ रहे मवेशी
मवेशियों के शहर और हाईवे की ओर पहुंचने के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों से उनका लगातार खदेड़ा जाना भी एक वजह बताई जा रही है। इन दिनों खेतों में धान की फसल तैयार हो रही है। फसल को नुकसान से बचाने के लिए आसपास के गांवों के किसान आवारा मवेशियों को शहर की ओर खदेड़ रहे हैं।
इसके चलते शहर के बाहरी इलाकों और हाईवे पर मवेशियों का जमावड़ा बढ़ रहा है। आरोप है कि नगर निगम की पेट्रोलिंग और पशु पकड़ने वाली टीमों की निगरानी मुख्य रूप से शहरी सीमा तक सीमित है, जबकि आउटर इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है।
छह कांजी हाउस हुए फुल
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पकड़े गए मवेशियों को सुरक्षित रखने की भी है। शहर के सभी छह कांजी हाउस पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि आसपास की गौशालाओं में भी क्षमता से अधिक पशु होने की बात सामने आई है। ऐसे में सड़कों से मवेशियों को हटाने के बाद उन्हें रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से समस्या और जटिल हो गई है।

‘गोधाम योजना’ पर उठ रहे सवाल
गोवंश संरक्षण के लिए प्रस्तावित गोधाम योजना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि योजना अब तक जमीन पर प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाई है और फाइलों व प्रस्तावों तक सीमित है। वहीं, हादसों को देखते हुए अंजोरा से चिचोला के बीच करीब 13 ब्लैक स्पॉट की पहचान किए जाने की बात भी सामने आई है।
रात में भी सक्रिय हैं काउ कैचर वाहन
नगर निगम आयुक्त जीआर मरकाम के अनुसार, सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाने और उन्हें पकड़कर कांजी हाउस पहुंचाने के लिए विशेष टीमें लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि रात के समय भी काउ कैचर वाहन सक्रिय रहते हैं।
मवेशियों के मालिकों पर कार्रवाई की मांग
लगातार हो रहे हादसों के बीच स्थानीय स्तर पर मवेशियों के मालिकों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। लोगों का कहना है कि केवल सड़कों से मवेशियों को हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। मवेशियों को खुले में छोड़ने वाले पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करने, आउटर क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और सुरक्षित पशु आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था करने की जरूरत बताई जा रही है, ताकि हाईवे पर होने वाले हादसों और गोवंश की मौतों को रोका जा सके।
