
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर आशीष झा ने कहा है कि ‘तीन टीकों ने ट्रायल में कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ बढ़िया नतीजे दिये हैं जिनमें से कोई एक टीका अगले वर्ष की शुरुआत में निश्चित रूप से तैयार हो जाएगा.’
कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी के साथ वीडियो कॉन्फ़्रेंस में प्रोफ़ेसर आशीष झा ने यह दावा किया है.
प्रोफ़ेसर आशीष ने कहा, “अमरीका, चीन और ब्रिटेन में चल रहे टीकों के ट्रायल के शुरुआती नतीजे बढ़िया हैं. अभी यह उम्मीद की जा सकती है कि अगले वर्ष की शुरुआत में इनमें से कोई एक टीका कोविड-19 की रोकथाम में प्रभावी साबित होगा. भारत को इसके लिए प्लान तैयार करना चाहिए कि उन्हें अपने लोगों के लिए यह टीका किस तरह हासिल करना है.”
प्रोफ़ेसर आशीष हार्वर्ड ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर उन्होंने काफ़ी काम किया है.
जब राहुल गांधी ने प्रोफ़ेसर आशीष से पूछा कि क्या बीसीजी का टीका मददगार है? और क्या कोरोना वायरस तेज़ गर्मी में निष्क्रिय हो सकता है? तो उन्होंने जवाब दिया, “बीसीजी का टीका मददगार हो सकता है. इसके कुछ संकेत भी मिलते हैं, पर इनके आधार पर पुख्ता तरीक़े से कुछ नहीं कहा जा सकता. रही बात गर्मी की तो अभी तक तो ऐसा नहीं देखा गया कि गर्मी का इस वायरस पर कुछ असर पड़ा हो. लेकिन यह देखा गया है कि खुली जगह में होने पर संक्रमण का ख़तरा किसी बंद जगह की तुलना में कम होता है.”
प्रोफ़ेसर आशीष ने कहा कि ‘टेस्टिंग की संख्या बढ़ाकर ही कोविड-19 को रोकना संभव है, संक्रमित लोगों का जितना तेज़ी से पता लगेगा, उतनी जल्दी ही इसे रोकने के प्रयास किये जा सकेंगे.’
हालांकि राहुल गांधी ने उन्हें बताया कि ‘कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे कहा है कि ज़्यादा टेस्ट करने का मतलब है लोगों को इस बीमारी से डराना.’
राहुल गांधी ने कहा, “जब मैंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल किया कि टेस्टिंग के नंबर कम क्यों हैं? तो उनकी दलील थी कि ज़्यादा टेस्ट करेंगे तो लोग ज़्यादा डरेंगे. लोगों में डर बैठेगा. लेकिन ये बात वो अनाधिकारिक रूप से कहते हैं.”
राहुल गांधी बीते कुछ दिनों से, अलग-अलग क्षेत्रों के सम्मानित लोगों से वीडियो कॉल पर चर्चा कर रहे हैं. पिछले दिनों उन्होंने आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और नॉबेल पुरस्कार से नवाज़े गए अभिजीत बनर्जी से कोविड-19 संकट पर चर्चा की थी.

