छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC विवाद से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है। विशेष अदालत ने उन्हें छह दिन की ED रिमांड पर भेजा है। दूसरी ओर, वर्ष 2003 की राज्य सेवा भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के पुराने मामले में EOW-ACB भी कार्रवाई को अंतिम रूप देने में जुटी है। एजेंसी की ओर से करीब 15 अधिकारियों के खिलाफ इसी महीने आरोप पत्र दाखिल किए जाने की संभावना जताई गई है।
WhatsApp चैट भी जांच के दायरे में
चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार करने के बाद ED ने उन्हें विशेष अदालत में पेश किया, जहां से छह दिन की रिमांड मिली। रिमांड मांगते समय जांच एजेंसी ने उत्कर्ष चंद्राकर के साथ कथित WhatsApp चैट का भी हवाला दिया। अब रिमांड के दौरान ED अधिकारियों की पूछताछ में कथित संपर्क, बातचीत और मामले से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अनियमितताओं से जुड़े लोगों के बीच किस तरह के संपर्क थे।
2003 PSC भर्ती मामले में भी कार्रवाई की तैयारी
इधर राज्य गठन के बाद हुई शुरुआती PSC भर्ती प्रक्रिया से जुड़े वर्ष 2003 के मामले में EOW-ACB की जांच भी अंतिम चरण में बताई जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 15 अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया जा रहा है। इसे सितंबर के अंत तक न्यायालय में पेश किए जाने की संभावना है। हालांकि, इसके लिए सरकार से आवश्यक अभियोजन अनुमति की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
17 अपात्र चयनित, 17 योग्य अभ्यर्थी बाहर होने का दावा
EOW की प्रारंभिक जांच और मूल डाटा की दोबारा गणना के लिए किए गए ड्राई रन में भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात कही गई है। जांच के मुताबिक, 17 अपात्र अभ्यर्थियों के चयन और 17 योग्य अभ्यर्थियों के चयन से बाहर होने का उल्लेख है। इसके अलावा 56 अभ्यर्थियों के पद और मेरिट क्रम में बदलाव मिलने की बात भी सामने आई है।
इंटरव्यू प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
जांच में 52 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने, जबकि इतने ही पात्र अभ्यर्थियों को इंटरव्यू का अवसर नहीं मिलने की बात कही गई है। इसके साथ ही कुछ अभ्यर्थियों की प्रोफाइल शीट में कथित छेड़छाड़ के संकेत मिलने का भी उल्लेख जांच में किया गया है।
1290 से ज्यादा अंक के बावजूद चयन नहीं
मामले में अभ्यर्थी वर्षा डोंगरे का प्रकरण भी जांच के दायरे में है। जांच के मुताबिक, उन्हें 1290.41 अंक मिलने के बावजूद चयन नहीं हुआ। उनकी प्रोफाइल शीट में आबकारी उप निरीक्षक पद के सामने की गई कथित काट-छांट की फोरेंसिक जांच में लिखावट और स्याही के मिलान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
स्केलिंग सिस्टम पर भी सवाल
जांच में मानव विज्ञान विषय के अभ्यर्थियों के अंकों में कथित विसंगतियों का भी उल्लेख किया गया है। समान 200 वास्तविक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को स्केलिंग के बाद अलग-अलग अंक मिलने की बात कही गई है। जांच दस्तावेजों में एक अभ्यर्थी को 170.01 और दूसरे को 239.22 अंक मिलने का उल्लेख है। इससे भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल की गई स्केलिंग व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
आरक्षण प्रक्रिया को लेकर भी आरोप
जांच में आरक्षण से जुड़ी कथित अनियमितता का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि एक अनारक्षित अभ्यर्थी को ST कोटे में शामिल कर राज्य लेखा सेवा का पद दिया गया। इन सभी आरोपों की अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।
तीन अभ्यर्थियों ने शुरू की थी कानूनी लड़ाई
राज्य गठन के बाद हुई पहली PSC परीक्षा में 147 पदों पर चयन हुआ था। चयन प्रक्रिया को लेकर तीन अभ्यर्थियों ने कानूनी लड़ाई शुरू की थी। इनमें कवर्धा की वर्षा डोंगरे, मुंगेली के चमन सिन्हा और राजनांदगांव के रविंद्र सिंह शामिल थे। मामला आगे हाईकोर्ट तक पहुंचा। बाद में वर्ष 2016 में यह सुप्रीम कोर्ट भी गया, जहां हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई थी।
सितंबर के अंत तक चार्जशीट की संभावना
फिलहाल EOW-ACB दस्तावेजों और अभियोजन अनुमति से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने में जुटी है। प्रक्रिया पूरी होने पर सितंबर के अंत तक करीब 15 अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए जाने की संभावना है। वहीं चेतन बोरघारिया की छह दिन की ED रिमांड के चलते CGPSC से जुड़े मौजूदा मामले में भी आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है।
