रायपुर से सटे आरंग तहसील क्षेत्र में पुश्तैनी जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। लोधीपारा वार्ड नंबर 3 निवासी 68 वर्षीय किसान रमाकांत लोधी का आरोप है कि उनकी पैतृक कृषि भूमि को फर्जी दस्तावेजों और गलत सीमांकन के जरिए हड़पने की कोशिश की जा रही है। किसान का कहना है कि वह पिछले करीब ढाई वर्षों से अपनी जमीन से जुड़े मामले को लेकर तहसील कार्यालय और जिला प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं।
पीड़ित किसान ने स्थानीय भू-माफिया, रसूखदार लोगों और राजस्व अमले की कथित मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। हालांकि, ये आरोप किसान की ओर से लगाए गए हैं और मामले में संबंधित अधिकारियों या अन्य पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है।
खसरा नंबर 3098 को लेकर है विवाद
किसान द्वारा अधिकारियों को दिए गए आवेदनों और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, आरंग नगर के पटवारी हल्का नंबर 29 में स्थित खसरा नंबर 3098 का रकबा 0.0410 हेक्टेयर है। किसान का दावा है कि यह जमीन उनकी पुश्तैनी और पैतृक कब्जे वाली कृषि भूमि है।
यह भूमि आरंग-खरोरा मुख्य मार्ग पर पंचमुखी महादेव मंदिर के पास स्थित बताई गई है। किसान के मुताबिक मुख्य मार्ग से लगी होने के कारण जमीन की वर्तमान बाजार कीमत काफी अधिक है।
खसरा नंबर 3101 की बिक्री के बाद बढ़ा विवाद
रमाकांत लोधी के आरोप के मुताबिक, गोपी यादव ने 16 अक्टूबर 2023 को अपनी भूमि खसरा नंबर 3101 कमलेश सिन्हा, निवासी बेमेतरा, को बेची थी।
किसान का दावा है कि भौतिक रूप से खसरा नंबर 3101 उनकी जमीन खसरा नंबर 3098 के पीछे स्थित है, लेकिन बिक्री के बाद उनकी जमीन खसरा नंबर 3098 को ही खसरा नंबर 3101 का हिस्सा बताने की कोशिश की गई।
इसी को लेकर किसान ने राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
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एकपक्षीय सीमांकन का लगाया आरोप
किसान का आरोप है कि खसरा नंबर 3098 और 3101 से जुड़े विवाद के बाद तत्कालीन हल्का पटवारी और राजस्व निरीक्षक की कथित मिलीभगत से पड़ोसी भू-स्वामियों की अनुपस्थिति में एकपक्षीय सीमांकन कराया गया।
रमाकांत लोधी का दावा है कि सीमांकन रिपोर्ट में उनकी जमीन की वास्तविक भौगोलिक स्थिति को अलग तरीके से दर्शाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान बी-1 और खसरा अभिलेखों में उनके काश्त-कब्जे से संबंधित जानकारी में कथित तौर पर बदलाव किया गया है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री से नहीं होती है।
ढाई साल से अधिकारियों के चक्कर लगाने का दावा
रमाकांत लोधी के अनुसार, वह पिछले करीब ढाई वर्षों से मामले के समाधान के लिए अलग-अलग अधिकारियों के पास आवेदन दे रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री जनदर्शन के साथ-साथ मंत्री, तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय में भी शिकायतें देने की बात कही है।
उन्होंने 9 मार्च 2024 और 30 मई 2026 को हुए सीमांकन पर लिखित आपत्ति दर्ज कराने का भी दावा किया है। किसान ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राजस्व मंत्री गुरु खुशवंत साहेब को भी आवेदन की प्रतियां भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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किसान ने की जिला स्तरीय जांच की मांग
पीड़ित किसान ने मांग की है कि खसरा नंबर 3098 से संबंधित एकपक्षीय और कथित कूटरचित सीमांकन रिपोर्ट की जांच कर उसे निरस्त किया जाए। उन्होंने आरंग तहसील के स्थानीय राजस्व अमले पर अविश्वास जताते हुए जिला स्तर की राजस्व टीम गठित कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
किसान ने यह भी मांग की है कि खसरा नंबर 3098 और 3101 से जुड़े विवाद का अंतिम निराकरण होने तक मौके पर किसी भी तरह के निर्माण, मेढ़ समतलीकरण या कथित अवैध कब्जे की कोशिश पर रोक लगाई जाए।
100 साल पुराने नक्शे का हवाला
रमाकांत लोधी का कहना है कि उनके पास कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त करीब 100 साल पुराना नक्शा भी है। उनके अनुसार इस नक्शे में जमीन की स्थिति वर्तमान भौतिक स्थिति के अनुरूप दिखाई गई है।
किसान का दावा है कि उनके पास जमीन के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की जांच और दोष पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल मामले में किसान की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और राजस्व अभिलेखों की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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