अंतरिक्ष में ग्रहों के निर्माण को लेकर वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है। खगोलविदों ने अब तक खोजे गए सबसे कम उम्र के एक्सोप्लैनेट (Youngest Exoplanet) की पहचान की है। इस नए ग्रह का नाम Elias 2-24 b है और वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसकी उम्र 10 लाख साल से भी कम हो सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि उम्र में बेहद छोटा होने के बावजूद यह ग्रह आकार और द्रव्यमान के मामले में काफी बड़ा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका द्रव्यमान लगभग बृहस्पति जितना है। यह ग्रह पृथ्वी से करीब 450 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है और अभी भी गैस और धूल से बनी उस डिस्क में मौजूद है, जहां इसका जन्म हुआ है।
पहले का रिकॉर्ड 50 लाख साल से ज्यादा पुराना था
वैज्ञानिकों के अनुसार, Elias 2-24 b से पहले सबसे कम उम्र के एक्सोप्लैनेट का रिकॉर्ड चार ग्रहों के नाम संयुक्त रूप से था। इन सभी ग्रहों की उम्र 5 मिलियन यानी 50 लाख साल से ज्यादा मानी जाती थी।
ऐसे में 10 लाख साल से कम उम्र वाले इस नए ग्रह की खोज ने वैज्ञानिकों के सामने ग्रह निर्माण को लेकर कई नए सवाल खड़े किए हैं। अध्ययन के सह-लेखक और चिली के Instituto de Estudios Astrofísicos के प्रोफेसर लुकास सिएजा के मुताबिक, मौजूदा ग्रह निर्माण मॉडल पहले से ही बेहद युवा ग्रहों को समझाने में संघर्ष करते रहे हैं।
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पुराने डेटा में छिपा था यह ग्रह
Elias 2-24 b की खासियत यह है कि वैज्ञानिकों ने इसे किसी बिल्कुल नए अवलोकन के जरिए नहीं खोजा। इसके बजाय शोधकर्ताओं ने पुराने डेटा आर्काइव को खंगाला।
चिली की Universidad Diego Portales की डॉक्टोरल कैंडिडेट एंड्रिया बर्नार्डी के नेतृत्व में टीम ने हवाई स्थित W.M. Keck Observatory से मिले पुराने अवलोकनों का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं का फोकस Elias 2-24 नाम के तारे पर था। इस तारे के चारों ओर गैस और धूल से बनी एक डिस्क मौजूद है, जिसमें ग्रहों का निर्माण हो सकता है।
इससे पहले Atacama Large Millimeter/submillimeter Array (ALMA) और European Southern Observatory के Very Large Telescope (VLT) से किए गए अवलोकनों में इस डिस्क के अंदर एक गैप दिखाई दिया था। वैज्ञानिकों को आशंका थी कि इस गैप के भीतर कोई ग्रह मौजूद हो सकता है।
कोरोनाग्राफ ने खोज में निभाई अहम भूमिका
पुराने Keck डेटा में coronagraph से किए गए अवलोकनों को शामिल किया गया था। कोरोनाग्राफ किसी चमकीले तारे की रोशनी को रोकने में मदद करता है। इससे तारे के आसपास मौजूद अपेक्षाकृत कम चमक वाली वस्तुओं को देखना संभव होता है। शोधकर्ताओं ने सात दूरस्थ तारों के आसपास मौजूद ऐसी डिस्क के डेटा का अध्ययन किया, जहां ग्रहों के निर्माण की संभावना थी।
वैज्ञानिकों का अनुमान था कि ग्रह अपने आसपास मौजूद गैस और धूल को प्रभावित करके डिस्क में गैप बना सकते हैं। इसलिए ऐसे गैप के भीतर किसी ग्रह के मिलने की संभावना हो सकती है। इसी प्रक्रिया में वैज्ञानिकों को Elias 2-24 b मिला।
ग्रह निर्माण को समझने का दुर्लभ मौका
किसी ग्रह को उसके जीवन के इतने शुरुआती चरण में देखना वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आमतौर पर ग्रहों के निर्माण के शुरुआती दौर का प्रत्यक्ष अध्ययन करना मुश्किल होता है, क्योंकि नवजात ग्रह अपने आसपास मौजूद गैस और धूल के बीच छिपे रहते हैं।
Elias 2-24 b अभी भी अपने निर्माण से जुड़ी सामग्री वाली डिस्क में मौजूद है। इसलिए वैज्ञानिकों को इसके जरिए यह समझने का अवसर मिल सकता है कि ग्रह अपने शुरुआती दौर में किस तरह विकसित होते हैं।
अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक, आकाशगंगा में नए तारे और ग्रह लगातार बनते रहते हैं। सिद्धांत रूप से उनके विकास के अलग-अलग चरणों को देखा जा सकता है, लेकिन मौजूदा टेलीस्कोप बेहद युवा ग्रहों को पहचानने में सीमित हैं।
