Bihar Assembly Election 2020 : चुनाव आयोग की गाइडलाइन आते ही बिहार में सीधी हुई सियासत की लाइन
चुनाव कराने न कराने के मुद्दे पर बिहार की राजनीति अभी तक बंटी हुई दिख रही थी, किंतु निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन आते ही सभी दलों की तैयारी तेज हो गई है। कोरोना संक्रमण के चलते जो दल चुनाव के टालने के पक्ष में थे, उनकी लाइन भी सीधी होती दिख रही है। किंतु-परंतु के साथ उन्हें चुनाव आयोग की गाइडलाइन मान्य हो गई है। सबसे ज्यादा राजद (RJD), लोजपा (LJP) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने विरोध किया था, किंतु अब उन्हें भी कुछ बिंदुओं पर असहमति तो है, किंतु ऐतराज नहीं है। चुनाव से परहेज भी नहीं।
आम मतदाताओं को भी बीमित करे सरकार
राजद और कांग्रेस का कहना है कि कोरोना संक्रमण और बाढ़ के चलते चुनाव कराने के लिए यह सही वक्त नहीं है। फिर भी आयोग की गाइडलाइन के हिसाब से काम किया जाएगा। उसके निर्देशों का अनुपालन होगा। हालांकि राजद ने नई गाइडलाइन के कुछ बिंदुओं से असहमति जताते हुए कुछ नई अपेक्षाएं भी रखी हैं। मसलन चुनावी ड्यूटी में लगाए गए कर्मचारियों की तरह आम मतदाताओं को भी बीमित करने और बूथों पर संक्रमित हो जाने पर फ्री इलाज की व्यवस्था की मांग की है।
जदयू ने किया स्वागत
समय पर चुनाव कराने के पहले से पक्षधर जदयू ने नई गाइडलाइन का स्वागत किया है। जदयू (JDU) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि जदयू ने आयोग को एक चरण में ही मतदान करा लेने का सुझाव दिया था। आखिर फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ सुरक्षित मतदान में किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। महागठबंधन (Grand Alliance) के सहयोगी राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (RLSP) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने गाइडलाइन से सहमति जताई है और कहा है कि कोरोना है तो सियासत के तौर-तरीके और चुनाव प्रक्रिया में बदलाव तो पहले से तय था। आयोग को स्थानीय प्रशासन पर नियंत्रण रखना पड़ेगा, ताकि विपक्षी नेताओं के अन्याय नहीं हो। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी को भी नई गाइडलाइन से कोई आपत्ति नहीं है।
बूथ लूटने वाले परेशान हैं, भाजपा नहीं : जायसवाल
सर्वदलीय बैठक में भाजपा ने जो अपेक्षाएं व्यक्त की थीं, आयोग ने उसे दरकिनार कर दिया। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल का कहना है कि उन्होंने खर्च की सीमा 28 लाख से बढ़ाने की मांग की थी। इसके बारे में गाइडलाइन में स्पष्ट नहीं किया गया है। प्रचार कार्य में लगने वाली गाडिय़ों की संख्या भी बढ़ाने की मांग की गई थी। हमारे दल के कई नेताओं की प्रोफाइल बड़ी है। कई केंद्रीय मंत्री हैं। पांच गाडिय़ों के काफिले से प्रचार संभव नहीं है। फिर भी आयोग की गाइडलाइन और आचार संहिता का अनुपालन करते हुए ही प्रचार किया जाएगा। जायसवाल ने कहा कि चुनाव के दौरान ही जनता के बीच जाने वाली हम पार्टी नहीं हैं। हमारा संपर्क निरंतर रहता है। संगठन आधारित पार्टी होने के कारण भाजपा पूरे वर्ष जमीनी स्तर पर काम करती रहती है। इसलिए हमें नई गाइडलाइन से कोई चिंता नहीं। किंतु जो वर्चुअल रैली (Virtual rally ) और ईवीएम (EVM) का विरोध कर रहे थे, वे चुनाव की संभावना देख कर अब छाती पर चढ़ कर सरकार बनाने की धमकी दे रहे हैं। लाठी में तेल पिलाकर बूथ लूटने वाले विरोध करके अपना असली चेहरा दिखा रहे हैं।
बूथों पर संक्रमित होने पर फ्री इलाज की व्यवस्था हो : राजद
राजद ने गाइडलाइन से नहीं, वक्त से आपत्ति जताई है। हालांकि उसने गाइडलाइन में कुछ जरूरी संशोधन के सुझाव भी दिए हैं। राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि बूथों पर मतदान के दौरान अगर कोई संक्रमित हो जाएगा तो इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा। इलाज के खर्चे की व्यवस्था भी आयोग को कराना चाहिए। सबसे ज्यादा ऐतराज बूथों पर लगने वाली भीड़ से है। राजद प्रवक्ता ने कहा कि एक हजार वोटरों की संख्या वाले बूथों पर फिजिकल डिस्टेंसिंग संभव नहीं होगा। इसलिए आयोग को प्रत्येक ढाई सौ वोटरों पर बूथ बनाने चाहिए। राजद नेता ने कहा कि कर्मियों की तरह मतदाताओं के लिए भी बीमा की व्यवस्था होनी चाहिए। डोर टू डोर प्रचार के लिए पांच लोगों की अनुमति को नाकाफी बताया है। जबतक वोटरों से व्यापक संवाद-संपर्क नहीं होगा, तबतक दल के विचारों का प्रचार कैसे हो सकेगा। बिहार में अभी कोरोना का खतरा है। संक्रमण बढ़ रहा है। इसलिए हालात सामान्य होने के बाद ही चुनाव कराया जाना चाहिए। सभी दल भाजपा और जदयू की तरह साधन संपन्न नहीं हैं। विपक्षी दलों के पास वर्चुअल तरीके से चुनाव-प्रचार करने की हैसियत और तैयारी नहीं है।
आयोग ने सरकार के हिसाब से गाइडलाइन बनाई : कांग्रेस
कांग्रेस को आयोग की गाइडलाइन सरकार के हिसाब से दिखती है। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सचिव अजय कपूर ने कहा कि आयोग ने विपक्ष से सलाह मांगी जरूर थी, लेकिन किया वही जो सरकार चाहती थी। लाशों के ढेर पर चुनाव कराना उचित नहीं है। किंतु आयोग भी उसी लाइन पर बढ़ता दिख रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव से ऐतराज नहीं है। हमारे कार्यकर्ता तैयार हैं, किंतु बूथों पर सुरक्षित मतदान की व्यवस्था किए बिना खतरे से खेलना है। सिर्फ ग्लव्स और मास्क पहना देने से ही मतदाताओं की सुरक्षा नहीं हो जाएगी। कपूर ने कहा कि गली-गली में कोरोना का विस्तार हो गया है। आधा बिहार जलमग्न है। फिर भी सरकार को सिर्फ कुर्सी दिख रही है।

