अहमद पटेल: अमित शाह-PM मोदी की मजबूत किलेबंदी की थी चूर-चूर, इकलौते नेता जिनका 10 जनपथ में भी था दफ्तर

Ahmed Patel Death: 1977 में जब देशभर में इंदिरा गांधी के खिलाफ हवा थी, खुद इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थीं, तब अहमद पटेल न सिर्फ खुद पहली बार भरूच से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे बल्कि गुजरात में कांग्रेस को जीत दिलवाई थी.

नई दिल्ली: 

Ahmed Patel Death: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पार्टी कोषाध्यक्ष और सोनिया गांधी के बेहद करीबी Ahmed Patel  का 71 साल की उम्र में निधन हो गया. करीब चार दशक का राजनीतिक जीवन जीने वाले अहमद पटेल कांग्रेस के शर्मीले नेता के तौर पर जाने जाते थे. साल 2017 में जब गुजरात में राज्य सभा का चुनाव हो रहा था, तब उन्हें हराने के लिए अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने उनके खिलाफ जबर्दस्त किलेबंदी की थी. कांग्रेस से ही बीजेपी में आए बलवंत सिंह राजपूत को शाह ने उम्मीदवार बनाया  था. इसके अलावा कांग्रेस के छह विधायक पार्टी छोड़ चुके थे. ऐसे में अहमद पटेल का लगातार पांचवीं बार संसद के उच्च सदन में पहुंचना मुश्किल लग रहा था लेकिन अहमद पटेल ने सारी सियासी आशंकाओं को गलत साबित करते हुए न केवल अपनी जीत दोहराई बल्कि सोनिया गांधी को कमतर करने की विपक्षी कोशिशों की भी हवा निकाल दी थी. 1993 से लगातार पटेल राज्यसभा सांसद थे.

21 अगस्त, 1949 को गुजरात के अंकलेश्वर में जन्में अहमद पटेल ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत नगरपालिका चुनाव से की थी. उन्होंने अपना पहला चुनाव ताल्लुका पंचायत के सभापति के रूप में जीता था. अपनी मेहनत और लगन से पटेल कांग्रेस के तेजतर्रार और युवा मेहनती नेता बन गए. इसके बाद वो तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के संपर्क में आ गए. 1977 से 1982 तक वो गुजरात युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे

1977 में जब देशभर में इंदिरा गांधी के खिलाफ हवा थी, खुद इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थीं, तब अहमद पटेल न सिर्फ खुद पहली बार भरूच से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे बल्कि गुजरात में कांग्रेस को जीत दिलवाई थी. 1977 से लगातार वो केंद्र की राजनीति में सक्रिय रहे. उन्होंने 1977, 1980 और 1984 का लोकसभा चुनाव भरूच से ही जीता.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तब अहमद पटेल को राजीव गांधी ने अपना संसदीय सचिव बना लिया था. साल 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद भी अहमद पटेल गांधी परिवार के विश्वस्त बने रहे. जब सोनिया गांधी ने पॉलिटिक्स में एंट्री की तो वो अहमद पटेल ही थे, जिन्होंने हर मौके पर सोनिया गांधी का साथ दिया और 2004 के चुनावों में जीत के लिए पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाई थी

अहमद पटेल ऐसे इकलौते कांग्रेसी नेता थे जिनका दफ्तर सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ में भी था. पटेल कांग्रेस के एक ताकतवर नेता था. 2018 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी भरोसा करते हुए उन्हें पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया था.