कुछ दिनों से मीडिया में एक ख़बर की चर्चा हो रही है जिसमें बताया जा रहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार को सोनिया गांधी की जगह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए का अध्यक्ष बनाया जा सकता है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, पवार के बारे में ये चर्चा कुछ अख़बारों में प्रकाशित लेखों से हुई जिनमें कहा गया कि पवार को कांग्रेस में मिल जाना चाहिए और इसके बाद पार्टी की कमान संभाल लेनी चाहिए.
इसके बाद गुरुवार को एक टीवी चैनल ने यह ख़बर चलाई जिसके बाद बाक़ी मीडिया में भी यह ख़बर चलने लगी और पवार की पार्टी को सफ़ाई देनी पड़ी.
एनसीपी ने इस ख़बर को बेबुनियाद बताया है.
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता महेश तापसे ने पत्रकारों से कहा है कि पार्टी की यूपीए के सहयोगियों से इस बारे में कोई चर्चा नहीं हुई है.
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तापसे ने कहा, “ऐसा लगता है कि कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग किसानों के आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए मीडिया में ऐसी ख़बरें प्लांट कर रहे हैं.”
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‘राजनीति में कुछ भी संभव’
लेकिन महाराष्ट्र में एनसीपी की सहयोगी शिव सेना ने कहा है कि ‘राजनीति में कुछ भी संभव है.’
पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, “राजनीति अनिश्चितताओं से भरी है. कोई नहीं जानता आगे क्या हो सकता है.”
“पवार साहब अगर यूपीए के चेयरमैन बनने जा रहे हैं. तो यह हमारे लिए ख़ुशी की बात है, लेकिन पवार साहब ने ख़ुद इससे इनकार किया है.”
वैसे राउत ने कहा कि “शरद पवार में देश का नेतृत्व करने की सभी क्षमताएँ हैं.”
वहीं समाचार एजेंसी पीटीआई ने महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री को यह कहते बताया है कि उन्होंने पार्टी में इस बारे में खोज-ख़बर लेने की कोशिश की, मगर ‘किसी को इसकी कोई भनक नहीं थी.’
शरद पवार हाल में किसानों के आंदोलन के दौरान सुर्खियों में रहे.
नौ दिसंबर को देश की विपक्षी पार्टियों ने इस बारे में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात की थी. इस प्रतिनिधिमंडल की अगुआई शरद पवार ने ही की थी.
पाँच नेताओं के प्रतिनिधिमण्डल में शरद पवार के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई महासचिव डी राजा और डीएमके नेता टीकेएस एलनगोवन शामिल थे.
यूपीए गठबंधन
इमेज स्रोत,THE INDIA TODAY GROUP
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए 2004 में बना था, जब कांग्रेस ने अन्य पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी.
मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने जबकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को गठबंधन का अध्यक्ष बनाया गया.
2017 में सोनिया गांधी ने कांग्रेस प्रमुख का पद छोड़ दिया, मगर वे यूपीए की अध्यक्ष बनी रहीं.
सोनिया गांधी की जगह राहुल गांधी ने पार्टी की कमान संभाली, लेकिन 2019 के आम चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया.
इसके बाद सोनिया गांधी को एक बार फिर पार्टी का नेतृत्व सौंपा गया

