आज का पंचांग 31 अगस्त 2026: सोमवार, 31 अगस्त 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी। तृतीया सुबह 08:50 बजे तक है, इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। इस दिन रेवती नक्षत्र 1 सितंबर की रात 03:23 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा।
31 अगस्त 2026 का पंचांग
- दिन: सोमवार
- तारीख: 31 अगस्त 2026
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद ऋतु
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: तृतीया सुबह 08:50 बजे तक, इसके बाद चतुर्थी
- नक्षत्र: रेवती, 1 सितंबर रात 03:23 बजे तक; इसके बाद अश्विनी
- योग: गण्ड, 1 सितंबर रात 01:51 बजे तक; इसके बाद वृद्धि
- राहुकाल: सुबह 07:56 बजे से 09:30 बजे तक
- सूर्योदय: सुबह 06:23 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:54 बजे
- दिशाशूल: पूर्व दिशा
तृतीया तिथि पर क्या न खाएं
दी गई धार्मिक मान्यता के अनुसार तृतीया तिथि पर परवल खाने से बचना चाहिए। मान्यता में इसे शत्रुओं की वृद्धि से जोड़ा गया है। इसके लिए ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्म खंड का संदर्भ दिया गया है।
चतुर्मास में इन बातों का रखें ध्यान
पंचांग में दी गई मान्यता के अनुसार चतुर्मास के दौरान तांबे और कांसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करने को पापनाशक बताया गया है।
31 अगस्त को संकष्टी चतुर्थी
दी गई जानकारी के अनुसार 31 अगस्त 2026 को संकष्टी चतुर्थी बताई गई है। इसमें चंद्रोदय का समय रात 08:36 बजे दिया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन सुबह भगवान गणेश का पूजन और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस दौरान गणपति मंत्र “ॐ गं गणपते नमः” और चंद्र मंत्र “ॐ सोमाय नमः” का जाप करने की बात कही गई है।
1 सितंबर को मंगलवारी चतुर्थी
दी गई जानकारी के अनुसार 1 सितंबर 2026, मंगलवार को सूर्योदय से सुबह 07:41 बजे तक चतुर्थी रहेगी। इसे मंगलवारी चतुर्थी के रूप में बताया गया है। इस अवसर पर बिना नमक का भोजन करने, मंगल देव का मानसिक आह्वान करने और चंद्रमा में भगवान गणेश की भावना करके अर्घ्य देने जैसी धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख किया गया है।
मंगल देव के 21 नामों के जाप की मान्यता
मंगलवारी चतुर्थी के अवसर पर मंगल देव के 21 नामों का स्मरण करने की बात कही गई है। इनमें मंगलाय, भूमिपुत्राय, ऋण हर्त्रे, धन प्रदाय, महाकाय, लोहित, भौम, अंगारक और भूमि नंदन सहित अन्य नाम शामिल हैं। दी गई धार्मिक मान्यता के अनुसार इन नामों का स्मरण करने के बाद धरती पर अर्घ्य देकर प्रार्थना करने की परंपरा बताई गई है। अर्घ्य के दौरान मंगल देव से ऋण से शांति की प्रार्थना करने का उल्लेख है।
