टूटा पुल, उफनती नदी और 3 KM पैदल सफर, फिर भी स्कूल पहुंच रहे शिक्षक

टूटा पुल, उफनती नदी और 3 KM पैदल सफर, फिर भी स्कूल पहुंच रहे शिक्षक

शिक्षक दिवस पर जहां देशभर में गुरुजनों के योगदान को याद किया जा रहा है, वहीं बस्तर के कुछ शिक्षक अपने जज्बे और जिम्मेदारी से मिसाल पेश कर रहे हैं। उफनती नदी, टूटा पुल और बंद रास्ते भी इन शिक्षकों को स्कूल पहुंचने से नहीं रोक पा रहे हैं। बस्तानार विकासखंड के लालागुड़ा गांव में संचालित प्राथमिक, माध्यमिक और हाई स्कूल में करीब 90 बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षक हर दिन मुश्किल रास्तों से होकर स्कूल पहुंचते हैं।

पहले मोटरसाइकिल, फिर नदी और 3 किलोमीटर पैदल सफर

लालागुड़ा स्कूल पहुंचने वाले शिक्षकों की रोज की यात्रा आसान नहीं है। शिक्षक सुबह मोटरसाइकिल से निकलते हैं और नदी के किनारे पहुंचकर अपनी गाड़ियां खड़ी कर देते हैं।

इसके बाद वे एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बहते पानी को पार करते हैं। नदी पार करने के बाद उन्हें करीब 3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इस तरह तमाम मुश्किलों को पार करने के बाद वे स्कूल पहुंचते हैं और बच्चों को पढ़ाते हैं। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह सफर और जोखिम भरा हो जाता है। इसके बावजूद शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

एक साल बाद भी टूटा पुल और रास्ता नहीं हुआ दुरुस्त

लालागुड़ा और आसपास के इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। 26 अगस्त 2025 की बाढ़ में बस्तर के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ था। बाढ़ के दौरान सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए थे। करीब एक साल गुजरने के बाद भी लालागुड़ा जैसे इलाकों में लोगों को टूटे रास्तों और नदी पार करने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों के लिए भी स्कूल तक पहुंचना रोज की चुनौती बना हुआ है।

बस्तर के अंदरूनी इलाकों में ऐसी कई तस्वीरें

बस्तर के कई दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों को इसी तरह की परिस्थितियों से जूझना पड़ता है। कहीं पुल की सुविधा नहीं है, तो कहीं नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। बारिश के मौसम में इन इलाकों में आवागमन और मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद शिक्षक नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का प्रयास कर रहे हैं।

बस्तर में उफनती नदी पार कर स्कूल जाते शिक्षक

डिजिटल अटेंडेंस ने बढ़ाई एक और चुनौती

शिक्षकों की परेशानी केवल स्कूल पहुंचने तक सीमित नहीं है। दुर्गम क्षेत्रों में VSK ऐप के जरिए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना भी चुनौती बन रहा है। जहां मोबाइल नेटवर्क और तकनीकी सुविधाएं कमजोर हैं, वहां शिक्षकों को पहले कठिन रास्तों से स्कूल पहुंचना पड़ता है और उसके बाद डिजिटल अटेंडेंस दर्ज करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

शिक्षा मंत्री ने बताया- कई जिलों में दर्ज हो रही डिजिटल उपस्थिति

डिजिटल अटेंडेंस को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का कहना है कि VSK ऐप के जरिए कई जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। मंत्री के मुताबिक, कोंडागांव में करीब 92 प्रतिशत और नारायणपुर में लगभग 78 प्रतिशत उपस्थिति ऐप के माध्यम से दर्ज की जा रही है। वहीं प्रदेश के करीब 700 स्कूलों में ऐप काम नहीं कर रहा है, जहां वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।

शिक्षकों का संघर्ष बच्चों के लिए प्रेरणा

एक तरफ शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं बस्तर के अंदरूनी इलाकों की तस्वीरें बताती हैं कि कई शिक्षकों के सामने आज भी स्कूल तक पहुंचने की बुनियादी चुनौती मौजूद है। लालागुड़ा के शिक्षक जिस तरह उफनती नदी, टूटे पुल और दुर्गम रास्तों को पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं, वह उनके समर्पण को दिखाता है। ये शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान ही नहीं दे रहे, बल्कि अपने संघर्ष और जिम्मेदारी के जरिए बच्चों को हिम्मत, अनुशासन और कर्तव्य का पाठ भी पढ़ा रहे हैं।

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