श्रावण मास के पहले सोमवार पर मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों भक्तों ने मां नर्मदा में पवित्र स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक और दर्शन किए। मंदिर परिसर पूरे दिन ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंजता रहा।
नर्मदा स्नान के बाद किए भगवान के दर्शन
तड़के से ही कोटितीर्थ, गोमुख, अभय समेत प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। भक्तों ने मां नर्मदा में स्नान कर पूजा-अर्चना की और इसके बाद भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।
शाम 4 बजे निकलेगी भगवान की पालकी
श्रावण मास के पहले सोमवार का मुख्य आकर्षण भगवान श्री ओंकारेश्वर की पारंपरिक पालकी यात्रा होगी। तय कार्यक्रम के अनुसार शाम 4 बजे भगवान शिव पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करेंगे। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
कोटितीर्थ घाट पर होगा वैदिक रुद्राभिषेक
पालकी यात्रा से पहले कोटितीर्थ घाट पर वैदिक विद्वानों की उपस्थिति में भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाएगा। पंचामृत और मां नर्मदा के पवित्र जल से अभिषेक के साथ वैदिक मंत्रोच्चार होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
यह भी पढ़ें:-भगवान शिव के 4 सबसे शक्तिशाली गण, घंटाकर्ण, भैरव, वीरभद्र से नंदी तक जानें अद्भुत रहस्य
फूलों से सजा मंदिर, सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
श्रावण मास के अवसर पर मंदिर को आकर्षक फूलों से सजाया गया है। गर्भगृह और मंदिर परिसर का विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस, मंदिर ट्रस्ट और नगर परिषद ने अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग, वन-वे दर्शन व्यवस्था, चिकित्सा सहायता, पेयजल और यातायात नियंत्रण सहित व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। घाटों पर गोताखोरों और सुरक्षा कर्मियों की भी तैनाती की गई है।
सावन के पहले सोमवार का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के पहले सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवसर पर ओंकारेश्वर में लाखों श्रद्धालु आस्था के साथ पहुंचते हैं।
