OneTag से आसान होगा FASTag पोर्ट

OneTag से आसान होगा FASTag पोर्ट

FASTag इस्तेमाल करने वाले करोड़ों वाहन मालिकों के लिए नई सुविधा आने वाली है। अब अगर कोई यूजर अपने FASTag जारी करने वाले बैंक की सेवाओं से संतुष्ट नहीं है या किसी दूसरे बैंक की सुविधा लेना चाहता है, तो उसे नया FASTag खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई OneTag सुविधा के तहत FASTag को मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि वाहन की विंडशील्ड पर लगा FASTag स्टिकर वही रहेगा, लेकिन उसका इश्यूअर बैंक बदला जा सकेगा।

देश में 98 फीसदी टोल कलेक्शन FASTag से

भारत में डिजिटल टोल कलेक्शन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। सरकार के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्गों पर करीब 98 फीसदी टोल कलेक्शन FASTag के जरिए हो रहा है। देश में अब तक करीब 13 करोड़ FASTag जारी किए जा चुके हैं। इतने बड़े यूजर बेस को देखते हुए सरकार FASTag से जुड़ी सेवाओं को ज्यादा आसान और सुविधाजनक बनाने पर जोर दे रही है। OneTag सुविधा इसी दिशा में एक अहम बदलाव मानी जा रही है।

स्टिकर बदले बिना बदल सकेंगे बैंक

नई व्यवस्था में FASTag यूजर को बैंक बदलने के लिए पुराने FASTag को वाहन से हटाने की जरूरत नहीं होगी। मौजूदा FASTag को ही नए बैंक के साथ जोड़ा जा सकेगा। यानी मोबाइल नंबर पोर्ट करने की तरह FASTag को भी एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट किया जा सकेगा। इससे यूजर अपनी जरूरत और पसंद के मुताबिक नया FASTag इश्यूअर चुन सकेगा।

टोल प्लाजा पर कम हो सकती है रुकने की जरूरत

सरकार की योजना सिर्फ FASTag पोर्टेबिलिटी तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में टोल कलेक्शन को AI, बैरियर-फ्री टोलिंग और फ्री-फ्लो मोबिलिटी जैसी तकनीकों से और बेहतर बनाने की तैयारी है।

इसका उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने की जरूरत को कम करना है। नई तकनीकों की मदद से वाहन की पहचान और टोल भुगतान की प्रक्रिया को ज्यादा तेज और ऑटोमेटेड बनाने पर जोर दिया जा रहा है। भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें वाहनों को टोल भुगतान के लिए बार-बार रुकना न पड़े और वे ज्यादा सुगमता से आगे बढ़ सकें।

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