इंसान के जीवन के लिए भोजन और पानी से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है, हवा। सांस लेने के दौरान हम ऑक्सीजन अंदर लेते हैं, जिसे प्राणवायु कहा जाता है। यानी इसके बिना जीवन की कल्पना नामुमकिन है। सांस लेने के दौरान हम ऑक्सीजन अंदर लेते हैं और कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं। शहर के शोरगुल, गंदगी और प्रदूषण भरे वातावरण में शुद्ध हवा मिलना मुश्किल हो गया है। लॉकडाउन की शुरुआत में हमें कुछ दिनो तक शुद्ध हवा नसीब हुई थी। हमलोगों में से अधिकतर लोग इन सामान्य जानकारियों से वाकिफ हैं, लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं श्वसन प्रक्रिया से जुड़े कुछ चौंकाने वाले तथ्यों के बारे में:
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आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सांस लेने के दौरान हम अपने फेफड़ों का केवल 25 फीसदी ही उपयोग करते हैं।
अमेरिकन लंग एसोसिएशन के मुताबिक, हमारे दोनों फेफड़ों का वजन 650 ग्राम के बराबर होता है।
20 से 25 साल की उम्र के दौरान इंसानों के फेफड़े परिपक्व होते हैं।
इसके 10 साल तक फेफड़े पूरी तरह से काम करते हैं और 35 साल की आयु के बाद फेफड़ों की कार्य क्षमता में उतार आना शुरू हो जाता है।
श्वसन प्रक्रिया के दौरान जब हम हवा अंदर खींचते हैं, तो 21 फीसदी ऑक्सीजन अंदर जाती है, जबकि हमारे शरीर को पांच फीसदी की ही जरूरत होती है, इसलिए बाकी हम सांस छोड़ते समय बाहर निकाल देते हैं।
हर दशक में सांस लेने की कुल क्षमता में से 0.2 लीटर की क्षमता कम होती चली जाती है।
क्या आप जानते हैं कि एक व्यस्क इंसान दिनभर मे 17,500 बार सांस लेता है?
श्वसन प्रक्रिया को ऐसे समझें
सांस लेने के दौरान हवा में मौजूद ऑक्सीजन हमारे फेफड़ों तक पहुंचती है और शरीर में ब्लड के संपर्क में आती है। इसके बाद ब्लड इसे अवशोषित कर लेता है और शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचाता है। इसी प्रक्रिया के कारण हमारे शरीर के अन्य अंग भी स्वस्थ रहते हैं। आपको जानकर आश्चर्य हो सकता है कि हमारे फेफड़े एक बार सांस लेने के दौरान चार लीटर तक हवा अंदर लेने और बाहर निकालने में सक्षम हैं।
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कितनी बार सांस लेते और छोड़ते हैं हम?
सामान्य व्यक्ति एक मिनट में औसतन 15 बार सांस लेता है। वहीं एक दिन में हर व्यक्ति औसतन 21600 बार सांस लेता और छोड़ता है।
इंसानों की तुलना में जानवरों के सांस लेने की गति बहुत अलग है। एक कुत्ता एक मिनट में 60 बार सांस लेता है, जबकि हाथी और कछुए हर मिनट केवल दो से तीन बार सांस लेते हैं।
सांस लेते वक्त हमारे सीने में हवा भर जाती है। फेफड़ों को तनाव रहित तरीके से जितना अधिक हो सके फुलाने के लिए गहरी सांस अंदर लें। ऐसा करने पर हमारे शरीर की पसलियां, गर्दन और हंसली ऊपर की ओर उठ जाती है, लेकिन पेट और डायफ्राम इससे प्रभावित नहीं होते हैं। अब सांस बाहर निकालते हुए छाती और पसिलियों को सामान्य कर लें। इस तरह से सांस लेने की प्रक्रिया हमारे स्वास्थ्य के लिए और लंबी आयु के लिए फायदेमंद होती है।

