भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने सेमी क्रायोजेनिक इंजन सिस्टम के 200 टन फुल-थ्रस्ट टेस्ट में बड़ी सफलता हासिल की है। 5 सितंबर 2026 को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित ISRO Propulsion Research Complex (IPRC) में Power Head Test Article (PHTA) का हॉट टेस्ट किया गया। यह इस टेस्ट सीरीज का नौवां हॉट टेस्ट था।
इस परीक्षण में पहली बार PHTA को उसकी पूरी 200 टन थ्रस्ट क्षमता पर चलाया गया। ISRO के सेमी क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम का लक्ष्य LVM3 को और अधिक शक्तिशाली बनाना है, जिससे भविष्य में भारी सैटेलाइट और बड़े अंतरिक्ष मिशनों को लॉन्च करने की क्षमता बढ़ सकती है।
पहली बार 200 टन के फुल थ्रस्ट पर चला PHTA
इस टेस्ट की सबसे अहम उपलब्धि यह रही कि PHTA को पहली बार 100 फीसदी यानी 200 टन थ्रस्ट पर संचालित किया गया। इससे पहले टेस्ट सीरीज में इसे अलग-अलग स्तरों पर चलाया जा चुका था। PHTA ने 47 फीसदी थ्रस्ट यानी 94 टन, 60 फीसदी यानी 120 टन और 88 फीसदी यानी 175 टन थ्रस्ट पर परीक्षण पूरा किया था। इस बार भी टेस्ट के दौरान इंजन से जुड़े जरूरी पैरामीटर उम्मीद के मुताबिक रहे। पूरा टेस्ट करीब 35 सेकंड तक चला, जिसमें पावर हेड को 200 टन के फुल थ्रस्ट पर करीब 5 सेकंड तक चलाया गया।

प्रोपेलेंट सप्लाई बदलने की क्षमता भी परखी
फुल-थ्रस्ट टेस्ट के साथ एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया की जांच की गई। परीक्षण के दौरान प्रोपेलेंट की सप्लाई को लो-प्रेशर स्टार्ट टैंक से मीडियम-प्रेशर रन टैंक में ट्रांसफर करने की क्षमता को भी परखा गया। यह क्षमता आगे होने वाले लंबे समय के हॉट टेस्ट के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगले चरण में PHTA को ज्यादा अवधि तक चलाकर सेमी क्रायोजेनिक सिस्टम के प्रदर्शन और विश्वसनीयता का व्यापक परीक्षण किया जाएगा।
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LVM3 की क्षमता बढ़ाने की तैयारी
ISRO का सेमी क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम LVM3 की लॉन्च क्षमता बढ़ाने की योजना का हिस्सा है। इसके तहत मौजूदा L110 कोर स्टेज को सेमी क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज SC120 से बदलने की योजना है।
SC120 स्टेज में 2000 kN क्लास का SE2000 इंजन लगाए जाने की बात कही गई है। इसके साथ LVM3 के C32 क्रायोजेनिक अपर स्टेज को भी अपग्रेड करने का प्रस्ताव है। इन बदलावों का उद्देश्य LVM3 को पहले से अधिक शक्तिशाली बनाना है। इससे भविष्य में रॉकेट के जरिए भारी पेलोड को ऑर्बिट में पहुंचाने की क्षमता बढ़ सकती है।
भारत के हेवी-लिफ्ट मिशनों के लिए अहम कदम
सेमी क्रायोजेनिक इंजन के इस फुल-थ्रस्ट टेस्ट को भारत के भविष्य के हेवी-लिफ्ट स्पेस मिशनों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। 200 टन थ्रस्ट पर PHTA का सफल परीक्षण पूरा होने के बाद ISRO अब लंबी अवधि और अधिक व्यापक हॉट टेस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ सकता है। आने वाले परीक्षणों के नतीजे से इस प्रोपल्शन सिस्टम की आगे की विकास प्रक्रिया और LVM3 में इसके इस्तेमाल को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
