वॉशिंगटन। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए NASA के James Webb Space Telescope (JWST) ने हमारे सौरमंडल से बाहर एक नए विशाल ग्रह (Exoplanet) की खोज की है। Beta Pictoris d नाम का यह ग्रह पृथ्वी से करीब 63 लाइट ईयर दूर स्थित Beta Pictoris तारा प्रणाली में मिला है। इसके साथ ही यह प्रणाली अब उन चुनिंदा ग्रह प्रणालियों में शामिल हो गई है, जहां कम से कम तीन ग्रहों की प्रत्यक्ष पुष्टि हो चुकी है।
यह खोज The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित अध्ययन में सामने आई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी ग्रह की पहचान मुख्य रूप से उसकी वायुमंडलीय रासायनिक पहचान (Chemical Fingerprint) के आधार पर की गई है।
खोज कैसे हुई?
शोध टीम James Webb Telescope के NIRSpec (Near-Infrared Spectrograph) उपकरण की मदद से पहले से ज्ञात ग्रह Beta Pictoris b के वातावरण का अध्ययन कर रही थी। इसी दौरान वैज्ञानिकों को अप्रत्याशित रूप से एक ऐसा स्पेक्ट्रोस्कोपिक संकेत मिला, जो किसी नए ग्रह की ओर इशारा कर रहा था।
विश्लेषण में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के विशिष्ट अवशोषण संकेत मिले। बाद में Webb के MIRI (Mid-Infrared Instrument) से किए गए अतिरिक्त अवलोकनों में मीथेन (Methane) और जलवाष्प (Water Vapor) की भी पुष्टि हुई, जिससे नए ग्रह की मौजूदगी लगभग निश्चित हो गई।
वैज्ञानिकों ने क्या कहा?
अध्ययन के प्रमुख लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो के पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता एडन गिब्स (Aidan Gibbs) ने कहा,
“हम किसी नए ग्रह की तलाश नहीं कर रहे थे। हम पहले से ज्ञात ग्रह का अध्ययन कर रहे थे, लेकिन डेटा में एक अप्रत्याशित संकेत दिखाई दिया, जिसने हमें इस नए ग्रह तक पहुंचाया।”
वहीं, शोध के प्रमुख वैज्ञानिक जीन-बैप्टिस्ट रफियो (Jean-Baptiste Ruffio) ने कहा कि स्पेक्ट्रोस्कोपी केवल ग्रह की पहचान ही नहीं करती, बल्कि उसके तापमान, रासायनिक संरचना और गति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराती है।
कितना बड़ा है Beta Pictoris d?
वैज्ञानिकों के अनुसार:
- ग्रह का द्रव्यमान बृहस्पति (Jupiter) से कम से कम दो गुना है।
- यह अपने तारे की परिक्रमा लगभग 30 Astronomical Units (AU) की दूरी पर करता है।
- इसकी कक्षा हमारे सौरमंडल में नेपच्यून (Neptune) की कक्षा के लगभग बराबर मानी जा रही है।
- यह Beta Pictoris प्रणाली के तीन ज्ञात ग्रहों में सबसे बाहरी कक्षा में स्थित है।
क्यों खास है यह खोज?
Beta Pictoris तारा प्रणाली लगभग 2.3 करोड़ वर्ष पुरानी है और इसे ग्रहों के निर्माण एवं विकास को समझने के लिए वैज्ञानिक लंबे समय से अध्ययन कर रहे हैं।
यह तारा प्रणाली धूल और मलबे (Debris Disk) से घिरी हुई है। यही धूल पारंपरिक दूरबीनों के लिए ग्रहों को देखना कठिन बना देती थी। लेकिन James Webb Telescope ने स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग करते हुए धूल के बीच से ग्रह के वातावरण के रासायनिक संकेतों की पहचान कर ली।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी ग्रह की मौजूदगी Debris Disk की असामान्य संरचना और उसकी स्पष्ट आंतरिक सीमा (Inner Edge) की भी व्याख्या कर सकती है।
अंतरिक्ष विज्ञान में नई दिशा
इस खोज को केवल एक नए ग्रह की खोज नहीं, बल्कि Exoplanet खोजने की तकनीक में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
अब तक अधिकांश ग्रहों की खोज प्रत्यक्ष इमेजिंग या अन्य पारंपरिक तरीकों से होती रही है। लेकिन Beta Pictoris d पहला ऐसा प्रत्यक्ष रूप से पुष्टि किया गया ग्रह है, जिसकी पहचान मुख्य रूप से Moderate-Resolution Spectroscopy के जरिए की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसी तकनीक की मदद से ऐसे ग्रह भी खोजे जा सकेंगे, जो धूल, गैस या अन्य जटिल खगोलीय संरचनाओं के कारण अब तक छिपे हुए हैं।
आगे क्या होगा?
शोधकर्ता अब James Webb Space Telescope से प्राप्त आंकड़ों का और गहराई से विश्लेषण करेंगे। इससे Beta Pictoris d के तापमान, वातावरण की संरचना, रासायनिक तत्वों और कक्षा के बारे में अधिक सटीक जानकारी मिलने की उम्मीद है।
यह खोज न केवल Beta Pictoris ग्रह प्रणाली को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य में सौरमंडल के बाहर जीवन की संभावनाओं वाले ग्रहों की खोज को भी नई गति दे सकती है।

