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छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 25 साल के जल समझौते की तैयारी

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल बंटवारे को लेकर प्रस्तावित 25 वर्षीय समझौते का प्रतीकात्मक दृश्य छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच समझौते की उम्मीद
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से जारी महानदी जल विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है। दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर 25 साल के समझौते की रूपरेखा तैयार होने की बात सामने आई है। इस प्रक्रिया में केंद्रीय जल आयोग (CWC) की तकनीकी रिपोर्ट अहम भूमिका निभा सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयोग 26 अक्टूबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण को सौंपने की तैयारी में है।

केंद्र सरकार की मध्यस्थता में हुई बैठकों के बाद इस अंतरराज्यीय विवाद पर सहमति बनने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। हालांकि, प्रस्तावित समझौते और जल आवंटन के अंतिम प्रावधानों पर आधिकारिक पुष्टि और अंतिम निर्णय का इंतजार रहेगा।

महानदी के 46 MAF पानी के बंटवारे का प्रस्ताव

प्रस्तावित फॉर्मूले के तहत महानदी के कुल 46 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी के बंटवारे की योजना सामने आई है। इसमें ओडिशा को 24 MAF और छत्तीसगढ़ को 22 MAF पानी आवंटित करने का प्रस्ताव बताया गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों राज्यों की जल जरूरतों के बीच संतुलन बनाना है। महानदी का पानी कृषि, पेयजल और अन्य आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में जल बंटवारे पर सहमति बनने से दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद दूर होने की उम्मीद है।

28 सितंबर को ट्रिब्यूनल के सामने रखे गए पक्ष

महानदी जल विवाद के समाधान की प्रक्रिया में 28 सितंबर की सुनवाई को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण के समक्ष दोनों राज्यों ने अपना-अपना पक्ष रखा था।

इसके बाद केंद्रीय जल आयोग की ओर से तैयार की जा रही तकनीकी रिपोर्ट को आगे की प्रक्रिया के लिए अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट के निष्कर्षों और दोनों राज्यों की सहमति के आधार पर समझौते की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

पोलावरम बांध के बैकवाटर प्रभाव और मुआवजे पर भी चर्चा

महानदी विवाद के साथ ही गोदावरी नदी पर आंध्र प्रदेश की पोलावरम बांध परियोजना से जुड़े मुद्दे पर भी बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है। छत्तीसगढ़ सरकार ने बांध के बैकवाटर प्रभाव का अध्ययन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर को सौंपा था।

बताया गया है कि अध्ययन पूरा हो चुका है। इसमें संभावित डूब क्षेत्र और सीमावर्ती गांवों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का आकलन किया गया है। अब राज्य सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित गांवों के विस्थापन, पुनर्वास और उचित वित्तीय मुआवजे का मुद्दा आंध्र प्रदेश के समक्ष उठा सकती है।

इस मामले में तकनीकी निष्कर्षों और संबंधित राज्यों के बीच बातचीत के आधार पर आगे का रास्ता तय होगा।

अमित शाह की मध्यस्थता में हुई उच्चस्तरीय बैठक

महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित होने की जानकारी दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा था।

रिपोर्ट के अनुसार, अगले महीने दोनों मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में एक और अहम बैठक हो सकती है। इसमें प्रस्तावित समझौते पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।

25 साल के समझौते से खत्म होगा विवाद

महानदी जल बंटवारे पर प्रस्तावित समझौता आगे बढ़ता है, तो इससे छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से जारी विवाद के समाधान का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, 25 वर्षीय समझौते की अंतिम शर्तें, पानी के आवंटन की व्यवस्था और दोनों राज्यों की औपचारिक सहमति स्पष्ट होने के बाद ही इसे निर्णायक सफलता माना जा सकेगा।

फिलहाल, केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट और आगामी बैठकों पर नजर रहेगी। इन्हीं के आधार पर पता चलेगा कि दोनों राज्य महानदी के पानी के बंटवारे पर अंतिम सहमति तक पहुंच पाते हैं या नहीं।

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