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NASA के Perseverance रोवर ने मंगल पर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, 45.22 किलोमीटर का सफर किया पूरा

NASA के Perseverance रोवर ने मंगल ग्रह पर सबसे ज्यादा दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड बनाया है। 11 अक्टूबर 2026 को अपने मिशन के 2,006वें मंगल दिवस यानी सोल पर रोवर के ओडोमीटर ने 45.22 किलोमीटर (28.10 मील) का आंकड़ा पार किया। इसके साथ ही उसने किसी दूसरे खगोलीय पिंड पर सबसे लंबी दूरी तक चलने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

NASA की जानकारी के मुताबिक, इस उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी मान्यता दी है। रोवर के इंजीनियरिंग ट्विन यानी पृथ्वी पर मौजूद उसके परीक्षण मॉडल को इस उपलब्धि के सम्मान में एक विशेष पट्टिका दी गई।

वैज्ञानिकों की खोज के कारण रिकॉर्ड बनने में हुई देरी

Perseverance का ओडोमीटर करीब दो महीने पहले, मिशन के 1,947वें सोल पर, रिकॉर्ड के लक्ष्य से लगभग 200 मीटर दूर था। तकनीकी रूप से यह दूरी रोवर की ऑटोनॉमस नेविगेशन प्रणाली की मदद से एक ही ड्राइव में तय की जा सकती थी।

हालांकि, उस समय रोवर एक ऐसे इलाके में पहुंचा था, जो वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। इसलिए टीम ने आगे बढ़ने के बजाय वहां मौजूद प्राचीन चट्टानों की सतह को घिसकर नमूने तैयार करने और नजदीक से वैज्ञानिक अध्ययन करने पर समय लगाया।

जब रोवर ने उस स्थान से आगे बढ़ना शुरू किया, तो उसने रिकॉर्ड की दूरी पार कर ली। इससे स्पष्ट होता है कि मिशन में केवल लंबी दूरी तय करना ही प्राथमिकता नहीं है, बल्कि रास्ते में मिलने वाली वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण संरचनाओं की जांच भी अहम भूमिका निभाती है।

मंगल के कठिन रास्तों पर चलने के लिए बदली तकनीक

45 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के दौरान Perseverance को बड़े पत्थरों वाले क्षेत्रों, ढलानों और असमान सतहों से गुजरना पड़ा। इन चुनौतियों से मिले अनुभवों के आधार पर इंजीनियरों ने रोवर के ड्राइविंग नियमों और सॉफ्टवेयर में कई बदलाव किए।

हजारों सिमुलेशन के बाद टीम ने रोवर के झुकाव की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 24 डिग्री कर दी। साथ ही, रोवर के निचले हिस्से के नीचे जरूरी खाली जगह को घटाकर 20 सेंटीमीटर किया गया, ताकि वह कुछ कठिन रास्तों पर भी आगे बढ़ सके।

इसके अलावा, चट्टानों से टकराने का जोखिम कम करने के लिए ब्रेकिंग सॉफ्टवेयर में सुधार किया गया। स्टीयरिंग मोटरों की करंट सीमा भी लगभग दोगुनी की गई। नई ‘डायनेमिक स्लिप टेबल्स’ तकनीक से पहियों के फिसलने की संभावना का अनुमान लगाने में मदद मिलती है।

टीम ने कुछ ढलानों पर चट्टान की सतह के आर-पार चलने की रणनीति भी अपनाई, जिससे पहियों को खुली चट्टानों पर बेहतर पकड़ मिल सके।

GPS के बिना मंगल पर अपनी जगह पहचानता है रोवर

Perseverance की सबसे अहम तकनीकी क्षमताओं में से एक ऑनबोर्ड ग्लोबल लोकलाइजेशन है। इस प्रणाली की मदद से रोवर ड्राइव पूरी करने के बाद अपनी वैश्विक स्थिति का अनुमान खुद लगा सकता है।

यह तकनीक जमीन से ली गई तस्वीरों की तुलना मंगल ग्रह की कक्षा से प्राप्त तस्वीरों से करती है। इसके जरिए रोवर अपनी स्थिति का पता लगा सकता है, जबकि मंगल पर पृथ्वी जैसी GPS व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

इस प्रणाली में Ingenuity हेलीकॉप्टर के बेस स्टेशन में मौजूद तेज प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है। इससे Perseverance को हर बार अपनी स्थिति निर्धारित करने के लिए पृथ्वी पर मौजूद टीम के निर्देशों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। परिणामस्वरूप, वह लंबे रास्तों पर अधिक स्वायत्त तरीके से आगे बढ़ सकता है।

हालांकि, इस प्रोसेसर को मंगल के कठोर विकिरण वाले वातावरण के लिए मूल रूप से तैयार नहीं किया गया था। मंगल का पतला वायुमंडल और वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र का अभाव सतह पर विकिरण से मिलने वाली सुरक्षा को सीमित करता है। विकिरण के कारण कंप्यूटर की मेमोरी में अस्थायी बिट-फ्लिप जैसी गड़बड़ियां हो सकती हैं।

इस चुनौती से निपटने के लिए इंजीनियरों ने सॉफ्टवेयर आधारित सुरक्षा उपाय विकसित किए, जिससे प्रणाली के भरोसेमंद तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

भविष्य में AI से और बेहतर होगी मंगल की खोज

NASA की टीम अब रोवर की स्वायत्त ड्राइविंग क्षमता को और बेहतर बनाने के लिए जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य AutoNav प्रणाली के लिए रणनीतिक रास्ते के अलग-अलग हिस्सों पर चलने के प्रभावी विकल्प तैयार करने में सहायता लेना है।

इससे भविष्य में लंबे सफर की योजना बनाना और सीमित संसाधनों के साथ अधिक गतिविधियां पूरी करना आसान हो सकता है। हालांकि, AI का इस्तेमाल रोवर की ड्राइविंग व्यवस्था में किस तरह और कितनी सीमा तक किया जाएगा, यह आगे के परीक्षणों और विकास पर निर्भर करेगा।

मंगल के क्रेटर की ऊंचाई पर जारी है अभियान

Perseverance अब मंगल ग्रह पर एक क्रेटर के किनारे की ऊंचाई वाले हिस्सों की ओर बढ़ रहा है। 45.22 किलोमीटर की यात्रा से मिले अनुभवों का इस्तेमाल रोवर को कठिन इलाकों में और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है।

यह उपलब्धि केवल दूरी का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि मंगल पर अधिक स्वायत्त तरीके से खोज करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर नेविगेशन, मजबूत ड्राइविंग सॉफ्टवेयर और AI आधारित योजना बनाने की संभावनाएं भविष्य के रोवर अभियानों को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।

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