योगेश यादव/रायपुर
सेंट्रल DESK- जिंदगी जीने का जिनमें जज्बा हो तो वाकई में इंसान कुछ ना कुछ करके दिखाता है, ऐसा ही कुछ देखने को मिला जहां एक नेत्रहीन महिला देश की पहली आईएफएस अधिकारी बनी।
यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करना इस परीक्षा में बैठना और इसे पास करना किसी अभ्यर्थी के लिए एक बहुत बड़ी जंग होती है, इन सारी कठिनाई को पार करके आज एक नेत्रहीन देश की पहली आईएफएस बनी।

साल 2014 में परीक्षा की थी पास…
आज हम बात कर रहे हैं बेनो जोफिन की जिसने सॉफिश दृष्टिहीन होने के बावजूद साल 2014 में यूपीएससी की परीक्षा में 343 वी रैंक इंडियन फॉरेन सर्विस अधिकारी बनकर असंभव को संभव कर दिखाया। चेन्नई की बेनो जेफिन एक रेलवे कर्मचारी पिता और ग्रहणी मां की बेटी, वह भले ही ही बचपन से ही दृष्टिहीन सही एक उन्होंने अपनी इस कमजोरी को कभी पढ़ाई के सामने मुश्किल नहीं करने दिया।

विदेश मंत्रालय में पदस्थ
25 वर्षीय बहनों ने इतिहास रचते हुए 2013-14 में यूपीएससी की परीक्षा क्लियर कर लिए आईएफएस के पद के लिए चुना गया वह अपना सपना तो पूरा कर चुकी थी लेकिन दृष्टिहीन होने के कारण ड्यूटी ज्वाइन करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी, अपनी जॉइनिंग के लिए उन्हें 1 साल का इंतजार करना पड़ा इसके बाद साल 2015 में उनका इंतजार खत्म हुआ और वह विदेश मंत्रालय में नियुक्त की गई इसके साथ ही बहनों जेफिन देश की पहली ऐसी नेत्रहीन अधिकारी बनी है जिन्हें विदेश विभाग में ही पद मिला।

मां सुनाती थी अखबार पढ़कर
यूपीएससी की तैयारी के समय से ही उनकी मां उन्हें अखबार पढ़ कर सुनाया करती थी इसके अलावा उनके पिता ही थे जो उनके लिए ब्रेल लिपि में लिखी गई किताबें खोज कर लाते थे। सिविल सर्विसेज में जाने का सपना बहनों ने तभी मन में सजा लिया था जब वह स्कूल में थी इसके लिए उन्होंने ब्रेल लिपि में लिखी किताबों को पढ़कर तैयारियां की वही इंटरनेट पर अपने सब्जेक्ट को सुनकर विषय के बारे में जाना और समझा देना आज इतिहास रच पाई है इसका श्रेय उनके माता-पिता को जाता है।

