वेतन से ज्यादा हो गया पेंशन खर्च, 8वें वेतन आयोग पर दिख सकता है असर

वेतन से ज्यादा हो गया पेंशन खर्च, 8वें वेतन आयोग पर दिख सकता है असर

नई दिल्ली, 27 जून 2025: केंद्र सरकार के बजट दस्तावेजों में एक दिलचस्प प्रवृत्ति सामने आई है—अब सरकार वेतन से ज्यादा खर्च पेंशन पर कर रही है। 2023-24 से शुरू हुई यह प्रवृत्ति आगामी वेतन से ज्यादा हो गया पेंशन खर्च, 8वें वेतन आयोग पर दिख सकता है असर-26 के बजट में भी जारी रहने की संभावना है। बजट प्रोफाइल के अनुसार, यह बदलाव केंद्र सरकार के वेतन आयोगों, विशेष रूप से प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग की दिशा और दायरे पर प्रभाव डाल सकता है।

📉 वेतन खर्च घटा, पेंशन खर्च बढ़ा

2025-26 के बजट अनुमानों के अनुसार:

वेतन पर अनुमानित खर्च: ₹1.66 लाख करोड़

पेंशन पर अनुमानित खर्च: ₹2.77 लाख करोड़

यह अंतर स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि अब पेंशन व्यय वेतन व्यय से लगभग 67% अधिक है। जबकि पूर्व के वर्षों—विशेष रूप से 2022-23 तक—वेतन खर्च पेंशन से अधिक रहता था, 2023-24 से यह समीकरण पलट गया।

📊 क्या सरकारी कर्मचारियों की संख्या घटी है?

2022-23 और 2023-24 के बीच ‘वेतन’ खर्च में ₹1 लाख करोड़ की भारी गिरावट देखी गई।
हालांकि, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि कर्मचारियों की संख्या 2017-18 से 2025-26 के बीच 32 से 37 लाख के बीच ही बनी रही है। इससे संकेत मिलता है कि खर्च में गिरावट संख्या की नहीं, वर्गीकरण के तरीके की वजह से आई है।

💼 भत्तों का पुनर्गठन और वर्गीकरण में बदलाव

2023-24 से सरकार ने वेतन से जुड़े महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता (HRA) जैसे भुगतान को ‘भत्ते (यात्रा खर्च को छोड़कर)’ श्रेणी में समाहित कर दिया। इसके परिणामस्वरूप:

वेतन मद में आकस्मिक गिरावट

लेकिन भत्ते मद में तेजी से वृद्धि

इसका मतलब है कि कुल व्यय में कोई कटौती नहीं हुई है, बल्कि उसे नई श्रेणियों में विभाजित कर दिया गया है।

🏛️ स्थापना व्यय बढ़ रहा है

‘वेतन’ और ‘पेंशन’ दोनों स्थापना व्यय के अंतर्गत आते हैं। साथ ही, इसमें ‘अन्य’ नाम की एक श्रेणी भी शामिल है।
2017-18 से अब तक के आंकड़ों से स्पष्ट है कि कुल स्थापना व्यय में लगातार वृद्धि हुई है—भले ही वेतन में गिरावट दर्ज की गई हो। यह वृद्धि ‘अन्य’ और ‘पेंशन’ के बढ़े हुए खर्च से प्रेरित है।

🔍 क्या असर होगा 8वें वेतन आयोग पर?

सरकार ने संकेत दिए हैं कि 8वां वेतन आयोग 2027 से प्रभावी हो सकता है।
वेतन आयोग आमतौर पर मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में समाहित करता है, जिससे ‘वेतन’ श्रेणी में अचानक उछाल दिखाई देता है।

इसका मतलब यह भी है कि:

जितनी देर से आयोग लागू होगा, उतना ज्यादा DA मूल वेतन के मुकाबले बढ़ेगा

एक बार समाहित करने के बाद, बजट में ‘वेतन’ खर्च में अचानक वृद्धि दर्ज होगी

इससे बजट संतुलन पर प्रभाव पड़ेगा और पेंशन बनाम वेतन समीकरण फिर बदल सकता है

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