रायपुर.
प्रदेश के निजी स्कूलों की मनमानी पर नियंत्रण लगाया जा सके, इसलिए राज्य सरकार ने उप समिति (कमेटी) का गठन किया था। इस कमेटी को निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर नियंत्रण लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी। कमेटी तय समय पर निजी स्कूलों की औसत फीस वृद्धि तय कर सके, इसलिए कमेटी का अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम को बनाया गया था। कमेटी में दो अन्य मंत्रियों के अलावा स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को रखा गया था। कमेटी फीस बढ़ोतरी प्रक्रिया के संबंध में दो बैठक कर चुकी है। बैठक के बाद भी अब तक निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं निकल पाया है। पालक कमेटी की तरफ आस लगाए बैठे हैं। दूसरी तरफ निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर तैयारी शुरू की जा चुकी है।
प्रदेशवासियों से मांगे थे सुझाव कमेटी ने 15 मई तक प्रदेशवासियां से फीस बढ़ोतरी को लेकर सुझाव मांगे थे। पूरे प्रदेश से लगभग 300 सुझाव फीस कमेटी को दिए गए थे। कमेटी के सामने सुझाव को इक_ । करके प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी उपसंचालक स्तर के अधिकारी को थी। 15 मई के बाद उप समिति फीस के संबंध में कहां तक पहुंची है, इसका जवाब उप संचालक से लेकर कमेटी के जिम्मेदार भी नहीं दे पा रहे हैं। फीस संबंधी आदेश नहीं निकलने की वजह से पालकों में जेब कटने का डर समाया हुआ है।
रायपुर जिले में 853 निजी स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में 853 निजी स्कूल हैं। इन स्कूलों में फीस, ड्रेस, स्पोट रस आयोजन, बुक्स, पिकनिक, एडवेंचर स्पोटर्स के नाम पर पालकों से अलग-अलग तरीके से उगाही की जाती है। बच्चों को सार्वजनिक परेशान ना किया जाए, इसलिए पालक प्रबंधन की मनमानी सहते हैं और अपनी जेब कटवाते हैं। पालकों को परेशान ना किया जाए, इसलिए राज्य सरकार ने उपसमिति का गठन किया है। अब तक उपसमिति द्वारा फीस बढ़ोतरी को लेकर कोई निर्णय नहीं ले पाने की वजह से मनमानी फीस वसूलने की तैयारी निजी स्कूल कर रहे हैं।
राज्य में संचालित अशासकीय/निजी शालाओं की फीस बढ़ोतरी के निर्णय के संबंध में उपसमिति से अब तक किसी भी तरह का आदेश नहीं आया है। वहां से आदेश आने के बाद ही मामले में कुछ कह पाएंगे। जितेंद्र शुक्ला, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

