खेल सामग्री खरीदी में 52.91 लाख की अनियमितता

खेल सामग्री खरीदी में 52.91 लाख की अनियमितता

राजनांदगांव। खेल एवं युवा कल्याण विभाग में खेल सामग्री की खरीदी को लेकर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कलेक्टर के निर्देश पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दण्डाधिकारी और वरिष्ठ जिला कोषालय अधिकारी की संयुक्त जांच में करीब 52.91 लाख रुपए की खरीदी में गंभीर प्रक्रियागत खामियां पाई गई हैं। जांच प्रतिवेदन के आधार पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक अल्बिस एक्का के निलंबन की अनुशंसा की गई है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव को प्रस्ताव भेजा गया है।

2018-19 से 2026-27 तक हुई खरीदी की जांच

संयुक्त जांच रिपोर्ट के अनुसार, सहायक संचालक अल्बियुस एक्का के कार्यकाल में वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2026-27 तक विभिन्न योजनाओं के तहत खेल सामग्री खरीदने में 52.91 लाख रुपए खर्च किए गए। जांच में आरोप है कि कई मामलों में निर्धारित वित्तीय अधिकारों की सीमा का उल्लंघन करते हुए कलेक्टर और सक्षम वित्तीय प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना खरीदी की गई।

निविदा और GeM प्रक्रिया नहीं अपनाने का आरोप

जांच के दौरान खरीदी की प्रक्रिया में भी कई कमियां सामने आईं। रिपोर्ट में बताया गया कि:

  • कई खरीदी में निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
  • GeM (Government e-Marketplace) के माध्यम से खरीद नहीं की गई।
  • क्रय समिति का गठन नहीं किया गया।
  • स्थानीय विक्रेताओं से सीधे खेल सामग्री खरीदी गई।
  • खरीदी गई सामग्री का भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया।
  • विभागीय अभिलेखों के उचित संधारण में भी कमी पाई गई।

जांच दल ने इन प्रक्रियागत कमियों को वित्तीय और प्रशासनिक नियमों के विपरीत माना है।

सहायक संचालक के निलंबन की अनुशंसा

संयुक्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, राजनांदगांव की ओर से सहायक संचालक अल्बिस एक्का के निलंबन की अनुशंसा की गई है। इसके साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। विभागीय जांच के दौरान खरीदी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जांच की जाएगी।

विभागीय जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

फिलहाल संयुक्त जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद खरीदी प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन और संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

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