श्राद्धकाल में सात विशेष शुद्धियों का रखना चाहिए ध्यान

*🌹श्राद्धकाल में सात विशेष शुद्धियों का ध्यान रखना चाहिए :*
*(1) नहा-धोकर शरीर शुद्ध हो ।*
*(2) श्राद्ध की द्रव्य-वस्तु शुद्ध हो ।*
*(3) स्त्री शुद्ध हो, मासिक धर्म में न हो ।*
*(4) जहाँ श्राद्ध करते हैं वह भूमि शुद्ध हो । गोझरण से, देशी गाय के गोबर से लीपन की हुई हो ।*
*(5) मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें ।*
*(6) ब्राह्मण भी शुद्ध भाववाला हो और तम्बाकू, जर्दा आदि का सेवन न करता हो ।*
*(7) मन को भी शुद्ध रखें ।*
*- 📖 ऋषि प्रसाद अगस्त 2014*

*🔹श्राद्धयोग्य तिथियाँ (भाग-१)🔹*

*🔹ऊँचे में ऊँचा, सबसे बढ़िया श्राद्ध श्राद्धपक्ष की तिथियों में होता है । हमारे पूर्वज जिस तिथि में इस संसार से गये हैं, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि को किया जाने वाला श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ होता है ।*

*🔹जिनके दिवंगत होने की तिथि याद न हो, उनके श्राद्ध के लिए अमावस्या की तिथि उपयुक्त मानी गयी है । बाकी तो जिनकी जो तिथि हो, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि पर बुद्धिमानों को श्राद्ध करना चाहिए ।*

*🔹जो पूर्णमासी के दिन श्राद्धादि करता है उसकी बुद्धि, पुष्टि, स्मरणशक्ति, धारणाशक्ति, पुत्र-पौत्रादि एवं ऐश्वर्य की वृद्धि होती। वह पर्व का पूर्ण फल भोगता है ।*

*🔹इसी प्रकार प्रतिपदा धन-सम्पत्ति के लिए होती है एवं श्राद्ध करनेवाले की प्राप्त वस्तु नष्ट नहीं होती ।*

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