सक्ती जिले के बाराद्वार स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो गई है। नए सत्र की शुरुआत हुए डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कक्षा 1 से 5 तक हिंदी और कक्षा 6 से 8 तक संस्कृत विषय की नियमित पढ़ाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में छात्र बिना पर्याप्त तैयारी के परीक्षा देने को मजबूर हैं।विद्यालय में 8 अगस्त से एफए-01 (फॉर्मेटिव असेसमेंट) परीक्षा प्रस्तावित है। हालांकि संबंधित विषयों की कक्षाएं शुरू नहीं होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। अभिभावकों का कहना है कि जिन विषयों की पढ़ाई ही नहीं हुई, उनकी परीक्षा लेना छात्रों के साथ अन्याय है।
शाला प्रबंधन समिति ने कलेक्टर से लगाई गुहार
इस समस्या को लेकर शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कलेक्टर सक्ती को ज्ञापन सौंपकर तत्काल वैकल्पिक शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और विद्यालय के प्राचार्य को भी भेजी गई है।समिति का कहना है कि विद्यालय की समय-सारिणी जारी होने के बावजूद संबंधित विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। दो शिक्षिकाएं मातृत्व अवकाश पर हैं, जबकि अन्य शिक्षकों को इन विषयों की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। इससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
प्रबंधन पर उठे सवाल
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार कक्षा 9 और 10 में संस्कृत की पढ़ाई प्राचार्य द्वारा कराई जा रही है, लेकिन कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अब तक कोई प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशों के बावजूद संसाधनों और बजट की कमी का हवाला देकर समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

अभिभावकों में बढ़ा असंतोष
लगातार बनी इस स्थिति से अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद में बच्चों का दाखिला स्वामी आत्मानंद विद्यालय में कराया था, लेकिन शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई अभिभावक अपने बच्चों का दूसरे स्कूलों में प्रवेश करा चुके हैं, जबकि अन्य भी ऐसा करने पर विचार कर रहे हैं।शाला प्रबंधन समिति ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए जल्द से जल्द शिक्षकों की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू हो सके और उन्हें बिना तैयारी के परीक्षा न देनी पड़े।
