महिला आयोग की सख्ती: दस्तावेज लौटाने को तैयार हुआ पति, कॉलेज उत्पीड़न मामले में 15 दिन में जांच रिपोर्ट तलब।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आयोजित 396वीं राज्य स्तरीय 185वीं जनसुनवाई में महिला उत्पीड़न

RAIPUR NEWS। रायपुर में सोमवार को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आयोजित 396वीं राज्य स्तरीय एवं रायपुर जिले की 185वीं जनसुनवाई में महिला उत्पीड़न, वैवाहिक विवाद, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और पंचायत स्तर के विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई की गई। आयोग ने कई मामलों में समझाइश देकर समाधान कराया, जबकि कुछ मामलों में एफआईआर और जांच के निर्देश भी जारी किए।

दस्तावेज वापस देने को तैयार हुआ पति

सुनवाई के दौरान एक मामले में प्रेम विवाह करने वाले दंपति पिछले 11 महीनों से अलग रह रहे थे। महिला ने आयोग को बताया कि उसके सभी जरूरी दस्तावेज पति के पास हैं और वह उन्हें वापस लेने के साथ-साथ आपसी सहमति से तलाक चाहती है। आयोग की समझाइश के बाद पति दस्तावेज लौटाने के लिए तैयार हो गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज वापस नहीं मिलने की स्थिति में महिला एफआईआर दर्ज करा सकती है।

नशे में प्रताड़ना करने वाले पति को चेतावनी

एक अन्य मामले में महिला ने शिकायत की कि समझौते के बाद दो वर्षों से साथ रहने के बावजूद पति शराब के नशे में उसे लगातार परेशान करता है। आयोग ने दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराने का निर्णय लिया और चेतावनी दी कि यदि प्रताड़ना जारी रहती है तो महिला पुलिस में एफआईआर दर्ज करा सकती है।

 

चरित्र हनन और अश्लील गाली मामले में जताया खेद

एक महिला ने गांव के दो लोगों पर चरित्र हनन और अश्लील गालियां देने का आरोप लगाया। सुनवाई के दौरान आरोपियों ने समाज के सामने माफी मांगने की बात कही। आयोग की समझाइश के बाद आरोपियों ने अपने व्यवहार पर खेद व्यक्त किया, जिसके बाद मामले का निस्तारण कर दिया गया।

कॉलेज उत्पीड़न मामले में महिला आयोग की एंट्री

शासकीय नवीन महाविद्यालय नवागांव की महिला सहायक प्राध्यापकों ने एक पुरुष प्राध्यापक पर छात्रों के सामने अभद्र व्यवहार, धमकी और अपमानित करने का आरोप लगाया। आवेदिकाओं ने बताया कि छात्रों को भी अंक काटने की धमकी देकर दबाव बनाया जाता है। दूसरी ओर आरोपी प्राध्यापक ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि महिला प्राध्यापक उनके खिलाफ एकजुट होकर शिकायत कर रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने इसे कार्यस्थल पर उत्पीड़न का मामला माना। आयोग ने कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति की निष्पक्षता पर उठे सवालों को देखते हुए अपनी सहायक संचालिका को जांच प्रक्रिया की निगरानी के लिए नियुक्त किया है। समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरपंच और उपसरपंच के विवाद में हुआ समझौता

एक अन्य मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच और उपसरपंच के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद की सुनवाई की गई। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें कर रहे थे। आयोग की समझाइश के बाद दोनों पक्ष आपसी सुलह के लिए तैयार हो गए, जिसके बाद मामला समाप्त कर दिया गया।

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