छत्तीसगढ़ सरकार का सुशासन तिहार गांवों और शहरों तक प्रशासन को सीधे पहुंचाने की पहल के रूप में सामने आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को समझना, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और जरूरतों का समयबद्ध समाधान करना रहा।
चौपाल में ग्रामीणों ने खुलकर रखी अपनी बात
सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री और प्रशासनिक टीमों ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने हैंडपंप, तालाब में घाट, सामुदायिक और आंगनबाड़ी भवन, सड़क, बिजली लाइन, स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और मध्यान्ह भोजन जैसी जरूरतों को सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कई सार्वजनिक जरूरतों पर मौके पर ही निर्णय लेकर ग्रामीणों को राहत देने की कोशिश की। अभियान का उद्देश्य यही रहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक आसानी से पहुंचे।
33 जिलों में चला अभियान
इस वर्ष सुशासन तिहार 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में संचालित किया गया। सभी 33 जिलों के 146 विकासखंडों में अधिकारियों और कर्मचारियों की अभियान टीमों का गठन किया गया। टीमों ने गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद किया और कई स्थानों पर रात में रुककर चौपाल के जरिए स्थानीय समस्याओं की जानकारी ली।

सरकारी योजनाओं की भी हुई समीक्षा
अभियान के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अंत्योदय अन्न योजना, अनाज के भंडारण और वितरण, पेयजल, बिजली व्यवस्था तथा मानसून से पहले आवश्यक वस्तुओं के भंडारण की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अलावा मनरेगा और अन्य रोजगारपरक कार्यों, श्रमिकों के मजदूरी भुगतान, राजस्व मामलों, नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन से जुड़े प्रकरणों की स्थिति भी देखी गई।
गांव, गरीब और किसानों पर फोकस
सुशासन तिहार के जरिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में गांव, गरीब और किसानों की जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया। चिकित्सा सेवाओं, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, कृषि पंपों के विद्युतीकरण और एकल बत्ती कनेक्शन जैसी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। अभियान में मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्रियों, प्रभारी सचिवों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी रही। सरकार का कहना है कि सुशासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से जनता तक पहुंचाना है।
