जो लोग श्राद्ध नहीं करते हैं वे स्वयं भी घाटे में रहते हैं और उनके पितर भी दुःखी होते हैं

2 अक्टूबर 2023, सोमवार – चतुर्थी का श्राद्ध*

 

*🔸जो लोग श्राद्ध नहीं करते हैं वे स्वयं भी घाटे में रहते हैं और उनके पितर भी दुःखी होते हैं । और जो श्राद्ध करते हैं वे स्वयं भी सुखी, सम्पन्न होते हैं और उनके दादे-परदादे… सब पुरखे भी सुखी होते हैं ।*

 

*🔸गरुड़ पुराण (धर्म कांड प्रेत कल्प: १०.५७-५८) में आता है :*

 

*कुर्वीत समये श्राद्धं कुले कश्चिन्न सीदति । आयुः पुत्रान् यशः स्वर्गं कीर्तिं पुष्टिं बलं श्रियम् ॥ पशून् सौख्यं धनं धान्यं प्राप्नुयात् पितृपूजनात् ।*

 

*🔸”श्राद्ध करने से कुल में कोई दुःखी नहीं रहता । पितरों की पूजा करके मनुष्य आयु, पुत्र.. यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है ।”*

 

*🔸जो श्राद्ध करते हैं उनके पास यश, धन- धान्य, सूझबूझ आती है, कुटुम्ब में अच्छी आत्माएँ आती हैं। पितरों का पिंडदान करनेवाला दीर्घायुष्य का धनी होता है ।*

 

*🔸श्राद्ध पक्ष में अपनी मृत्युतिथि पर पितर अंतवाहक शरीर से अपने परिवार के यहाँ जाते हैं। पितरों का पंचभौतिक शरीर नहीं होता है, वायुमय शरीर होता है । वे बाट देखते रहते हैं कि ‘हमारे पुत्र-पौत्र, संबंधी हमारा श्राद्ध करें ।” यदि श्राद्ध नहीं करते हैं तो बेचारे निराश होकर दुःखित मन से अपने वंशजों की निंदा करते हैं और लम्बी-लम्बी साँस खींचते हुए अपने-अपने लोकों में जाते हैं । तो उस कुल खानदान के लिए आशीर्वाद के बदले जो कुछ निकलता होगा वे जानें ।*

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