आज का वैदिक पंचांग और एकादशी व्रत की महिमा: 20 जुलाई 2025

🌞 20 जुलाई 2025, रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है, जो दोपहर 12:12 तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि आरंभ हो जाएगी।

🌿 आज का पंचांग:

दिनांक – 20 जुलाई 2025

दिन – रविवार

विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)

शक संवत – 1947

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – वर्षा ऋतु

मास – श्रावण (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार आषाढ़)

पक्ष – कृष्ण

तिथि – दशमी दोपहर 12:12 तक, तत्पश्चात एकादशी

नक्षत्र – कृत्तिका रात्रि 10:53 तक, फिर रोहिणी

योग – गण्ड रात्रि 9:48 तक, तत्पश्चात वृद्धि

राहुकाल – शाम 5:43 से 7:22 तक

सूर्योदय – सुबह 6:08

सूर्यास्त – शाम 7:21

दिशाशूल – पश्चिम दिशा

 

🌸 व्रत एवं पर्व विवरण

एकादशी व्रत का महत्व

आज दोपहर के बाद एकादशी तिथि आरंभ होगी जो 21 जुलाई सोमवार सुबह 9:38 तक रहेगी।
व्रत का पालन सोमवार को किया जाएगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार,

एकादशी व्रत करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

यह व्रत करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

धन-धान्य, संतान और कीर्ति की वृद्धि होती है।

भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

ग्रंथों में वर्णित है कि एकादशी का व्रत करने से सूर्यग्रहण में किए गए दान से भी अधिक पुण्य प्राप्त होता है।

🌿 एकादशी पर क्या करें?

एकादशी की रात्रि में दीप जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

अगर सहस्रनाम उपलब्ध न हो तो गुरुमंत्र की 10 माला जप करें।

यदि घर में झगड़े होते हों, तो एकादशी के दिन यह पाठ विशेष रूप से करें, परिवार में शांति आएगी।

 

🌿 एकादशी के दिन सावधानी:

वृद्ध, बीमार और बच्चे व्रत न कर सकें तो भी चावल का त्याग अवश्य करें।

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि एकादशी के दिन चावल खाने से कीड़ा खाने के बराबर पाप लगता है।

रविवार के दिन तिल का तेल, मसूर की दाल, अदरक और कांसे के पात्र में भोजन करना वर्जित माना गया है।

 

🌳 विशेष धार्मिक अनुशासन:

स्कंद पुराण के अनुसार रविवार को बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए।

चतुर्मास में तांबे व कांसे के पात्र के स्थान पर अन्य धातु के बर्तन उपयोग में लाएं।

पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक माना गया है।

 

📖 धार्मिक प्रेरणा:

भगवान शिव ने स्वयं कहा है कि एकादशी व्रत से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी जैसे महान व्यक्तियों ने भी इस व्रत का पालन कर पृथ्वी का ऐश्वर्य प्राप्त किया था।

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