बाल्यकाल में किससे सावधान रहना चाहिए ?

🔹बाल्यकाल में किससे सावधान रहना चाहिए ?🔹

🔸दुष्टों के संग से, स्वार्थियों की अक्ल और होशियारी से, मूखों से अदूरदर्शन, थोड़ी-सी चोरी, थोड़ा-सा आलस्य, थोड़ा-सा ऐसा-वैसा स्वभाव, थोड़ा-सा यह चलेगा, जरा यह चलेगा, चल जायेगा- चल जायेगा – ऐसा करते-करते अपने सद्गुण छोड़ते जाते हैं और ‘दुर्गुण चल जायेगा’ ऐसा सोचते हैं तो इससे वह महादुर्गुणी हो जाता है ।

🔹पाँच सावधानियाँ हैं :🔹

(१) अभिमान न करे। पढ़ाई में, कबड्डी में, खेल में जीत गये तो अभिमान न आये ।

(२) किसी पर क्रोध न करे ।

(३) पाठ बाद में याद कर लेंगे’ इस प्रकार का प्रमाद न करे । इससे भी बच्चों का विकास होगा ।

(४) संयम रखे । बुरी नजर से लड़की लड़के को देखे, लड़का लड़की को देखे… इससे जीवनीशक्ति नाश होती है ।

(५) आलस्य न करे ।

🔹यह भी विद्यार्थी जीवन में बहुत नुकसान करता है । जिस समय जो काम करना है, तत्परता से करो । लापरवाही से काम को बिगाड़ें नहीं तो अच्छे विद्यार्थी बनेंगे ।

🔹बुद्धि के कितने नाम होते हैं ? मनीषा, धिषणा, धी, प्रज्ञा, शेमुषी, मति ये सारे नाम बुद्धि के हैं । इनका अलग-अलग प्रभाव होता है । उचित – अनुचित का निर्णय करना यह मति का काम है। धृति और बुद्धि दोनों इकट्ठी हो तो उसे बोलते हैं ‘मेधा’ ।

🔹मेधावी का क्या अर्थ है ?🔹

🔸जिसमें अनुचित को छोड़ने का सामर्थ्य और उचित में डटे रहने का सामर्थ्य होता है, उसको ‘मेधावी’ बोलते हैं ।

🔸विद्यार्थी जीवन में और व्यावहारिक जीवन में अपनी बुद्धि ठीक होनी चाहिए, मेधावी बनना चाहिए ।

 

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