🔹धन-सम्पदा प्रदायक व मनोकामना पूर्ण करनेवाले पूजनीय वृक्ष
🔸यदि आर्थिक सम्पन्नता चाहते हैं तो नित्य पीपल के वृक्ष में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का उच्चारण करते हुए जल अवश्य दें और कम-से-कम ७ बार परिक्रमा करें । (रविवार को पीपल के स्पर्श से बचें ।)
🔸पद्म पुराण में वेदव्यासजी ने कहा है : ‘पीपल का वृक्ष अत्यंत पूजनीय माना गया है । पीपल को रोपने, रक्षा करने, छूने तथा पूजन से वह क्रमशः धन, पुत्र, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करता है ।’
🔸 स्कंद पुराण में आता है : ‘आँवला भगवान को परम प्रिय एवं सब पापों का नाश करनेवाला है अतः समस्त कामनाओं की सिद्धि के लिए आँवले के वृक्ष का पूजन करना उचित है । लक्ष्मीप्राप्ति की इच्छा रखनेवाला मनुष्य नवमी, अमावस्या, सप्तमी, संक्रांति के दिन, रविवार, चन्द्रग्रहण तथा सूर्यग्रहण को छोड़कर सदा आँवलों से स्नान करे, विशेषतः एकादशी को आँवले से स्नान करने पर भगवान संतुष्ट होते हैं ।’
🔸शास्त्रों के अनुसार वटवृक्ष के दर्शन, स्पर्श, परिक्रमा तथा सेवा से पाप दूर होते हैं । संत श्री आशारामजी आश्रम की विभिन्न शाखाओं में पूज्य बापूजी द्वारा शक्तिपात किये हुए मनोकामना पूर्ण करनेवाले वटवृक्ष (बड़ बादशाह) हैं, जिनकी परिक्रमा करने तथा थोडी देर वहाँ शांत बैठने से असंख्य लोगों की मनोकामनाएँ पूर्ण हुई हैं । अपने नजदीकी आश्रम में जा के बड़ बादशाह की परिक्रमा प्रार्थना से आप लौकिक व आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं ।
🔸तुलसी उपनिषद् में आता है कि ‘तुलसी परिक्रमा करने से दरिद्रता का नाश करनेवाली तथा जड़ की मिट्टी लगाने से बड़े भारी पापों का विनाश कर देनेवाली है । तुलसी की जड़ में भगवान विष्णु तथा छाया में लक्ष्मीजी का निवास है ।’
🔸’जहाँ तुलसी की सुगंध लेकर हवा चलती है वहाँ की दसों दिशाएँ और चारों प्रकार के जीव पवित्र हो जाते हैं ।’

