11 सितंबर 2026 पंचांग, अमावस्या आज, जानें राहुकाल

11 सितंबर 2026 पंचांग, अमावस्या आज, जानें राहुकाल

11 सितंबर 2026 का पंचांग

दिन: शुक्रवार
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: शरद ऋतु
मास: भाद्रपद
पक्ष: कृष्ण पक्ष

तिथि: अमावस्या सुबह 8:56 बजे तक, इसके बाद प्रतिपदा शुरू होगी।
नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी दोपहर 1:16 बजे तक, फिर उत्तराफाल्गुनी।
योग: साध्य शाम 5:02 बजे तक, इसके बाद शुभ योग रहेगा।

आज का राहुकाल और दिशाशूल

11 सितंबर को राहुकाल सुबह 11:03 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा।

  • सूर्योदय: सुबह 6:25 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 6:44 बजे
  • दिशाशूल: पश्चिम दिशा

आज कौन सा व्रत और पर्व है

11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या और कुशोत्पाटिनी अमावस्या है। इसके साथ अमावस्यांत श्रावण मास की समाप्ति भी मानी गई है। धार्मिक ग्रंथों में अमावस्या और व्रत के दिनों के लिए कुछ आहार एवं आचरण संबंधी नियम बताए गए हैं। दिए गए स्रोत में ब्रह्मवैवर्त पुराण के आधार पर तिल के तेल के सेवन और उपयोग से बचने की बात कही गई है। चतुर्मास को लेकर भी धार्मिक मान्यताओं में कुछ नियम बताए गए हैं। स्कंद पुराण के संदर्भ में इस अवधि में तांबे और कांसे के पात्रों के बजाय अन्य धातुओं के पात्रों के इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है। वहीं पलाश के पत्तों की पत्तल में भोजन करने को धार्मिक रूप से पुण्यकारी बताया गया है।

14 सितंबर को शिवा चतुर्थी

14 सितंबर 2026, सोमवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी होगी। भविष्य पुराण के अनुसार इसे ‘शिवा चतुर्थी’ कहा गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन स्नान, दान, उपवास और जप जैसे सत्कर्म करने से विशेष फल प्राप्त होता है। दिए गए स्रोत में महिलाओं और कन्याओं के लिए भी इस दिन से जुड़े कुछ व्रत और परंपराओं का उल्लेख किया गया है। इसी दिन गणेश चतुर्थी का पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश की पूजा के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नम:’ मंत्र का जाप, गुड़ मिले जल से अभिषेक तथा दूर्वा और सिंदूर अर्पित करने का विधान बताया गया है।

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों नहीं करना चाहिए

गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन को लेकर हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष मान्यता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार 14 सितंबर 2026 को चंद्रास्त रात 8:53 बजे होगा और इस दिन चंद्र दर्शन निषिद्ध माना गया है। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति पर मिथ्या कलंक लग सकता है। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी स्यमंतक मणि की कथा को भी इसी धार्मिक मान्यता से जोड़ा जाता है। गणेश पुराण में भी चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से जुड़े दोष और कलंक की मान्यता का उल्लेख बताया गया है।

गलती से चंद्रमा दिख जाए तो क्या करें

धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि गणेश चतुर्थी के दिन अनजाने में चंद्र दर्शन हो जाए, तो स्यमंतक मणि की कथा का श्रवण करने को दोष निवारण के उपाय के रूप में बताया गया है। श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के 56वें और 57वें अध्याय में इस कथा का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा चंद्र दर्शन दोष निवारण के लिए एक विशेष मंत्र के जाप की परंपरा भी बताई गई है। दिए गए स्रोत के अनुसार इस मंत्र का 21, 54 या 108 बार जाप किया जा सकता है।

चंद्र दर्शन दोष निवारण मंत्र

“सिंहः प्रसेनमवधीत्, सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः॥”

इस मंत्र का संबंध स्यमंतक मणि की कथा से बताया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंत्र जाप या स्यमंतक मणि की कथा सुनने से चंद्र दर्शन से जुड़े मिथ्या कलंक के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है।

स्यमंतक मणि की कथा का महत्व

स्यमंतक मणि की कथा में भगवान श्रीकृष्ण पर मणि चोरी करने का आरोप लगने का प्रसंग आता है। बाद में कथा के माध्यम से इस आरोप का निराकरण होता है। इसी प्रसंग को गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से जुड़ी मिथ्या कलंक की धार्मिक मान्यता से जोड़ा जाता है।

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