गणेश चतुर्थी का पर्व इस साल 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। त्योहार से पहले बाजारों में गणपति बप्पा की मूर्तियों की खरीदारी शुरू हो गई है। कई परिवार अपनी पसंद की प्रतिमा पहले ही बुक कर लेते हैं और फिर उसे स्थापना से एक या दो दिन पहले घर ले आते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या गणेश प्रतिमा पहले घर लाई जा सकती है या उसे स्थापना के मुहूर्त में ही लाना जरूरी है? धार्मिक परंपराओं के अनुसार, गणपति का आगमन और विधिवत स्थापना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। मूर्ति को एक-दो दिन पहले घर लाया जा सकता है। हालांकि, पूजा स्थल पर विधिवत विराजमान कर संकल्प, आवाहन और मुख्य पूजा गणेश चतुर्थी के निर्धारित मुहूर्त में करना उचित माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी।गणेश चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में गणपति स्थापना और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, पूजा का सटीक मुहूर्त शहर के अनुसार अलग हो सकता है।
एक या दो दिन पहले घर ला सकते हैं गणपति
गणेश प्रतिमा को गणेश चतुर्थी से एक या दो दिन पहले घर लाया जा सकता है। खासकर बड़े शहरों में भीड़, ट्रैफिक और पसंद की मूर्ति उपलब्ध नहीं होने जैसी स्थितियों को देखते हुए कई परिवार पहले ही प्रतिमा घर ले आते हैं। मूर्ति को घर लाने का मतलब यह नहीं है कि उसकी स्थापना भी हो गई। आगमन के बाद प्रतिमा को साफ और सुरक्षित स्थान पर सम्मानपूर्वक रखा जा सकता है। विधिवत स्थापना गणेश चतुर्थी के निर्धारित पूजा मुहूर्त में की जाती है। अगर परिवार में गणपति आगमन या स्थापना को लेकर कोई विशेष कुल अथवा पारिवारिक परंपरा चली आ रही है, तो उसे प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।
गणपति आगमन और स्थापना में क्या अंतर है
गणपति आगमन का अर्थ है मूर्तिकार या दुकान से गणेश प्रतिमा को घर लेकर आना। इस दौरान परिवार के लोग पूजा या स्वागत की अपनी परंपरा के अनुसार बप्पा का अभिनंदन कर सकते हैं। वहीं गणपति स्थापना में प्रतिमा को पूजा स्थल पर निर्धारित आसन पर विराजमान कराया जाता है। इसके बाद संकल्प, आवाहन और अन्य पूजन कर्म किए जाते हैं। आसान शब्दों में समझें तो मूर्ति का घर पहुंचना आगमन है, जबकि पूजा-संकल्प के साथ पूजा स्थल पर विराजमान करना स्थापना है।
पहले घर लाई गई मूर्ति कहां रखें
अगर प्रतिमा स्थापना से पहले घर लाई जा रही है, तो उसके लिए पहले से साफ और सुरक्षित स्थान तैयार कर लेना चाहिए।
- प्रतिमा को सीधे फर्श पर रखने से बचें और साफ चौकी या ऊंचे स्थान का इस्तेमाल करें।
- ऐसी जगह चुनें जहां मूर्ति के गिरने या क्षतिग्रस्त होने का खतरा न हो।
- प्रतिमा को जूते-चप्पल या गंदे सामान के पास न रखें।
- पैक की हुई मूर्ति हो तो परिवार की परंपरा के अनुसार उसे सुरक्षित ढंग से रखा जा सकता है।
- स्थापना से पहले प्रतिमा को मुख्य पूजा आसन पर विधिवत स्थापित न करें।
- घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हों तो स्थान चुनते समय विशेष सावधानी रखें।
प्रतिमा के सामने नियमित पूजा कब से शुरू करनी है, इसे लेकर अलग-अलग परिवारों की परंपराएं हो सकती हैं।
चतुर्थी के दिन ही मूर्ति लाना जरूरी है
ऐसा कोई सार्वभौमिक नियम नहीं बताया गया है कि गणेश प्रतिमा केवल चतुर्थी के दिन ही घर लाई जाए। अगर मूर्ति पहले से बुक है या घर से दुकान की दूरी अधिक है, तो उसे पहले घर लाना सुविधाजनक हो सकता है। अगर प्रतिमा चतुर्थी के दिन ही लानी है, तो कोशिश करें कि स्थापना के मुहूर्त से पहले बप्पा घर पहुंच जाएं। इससे मूर्ति की सजावट और पूजा सामग्री की तैयारी समय पर की जा सकेगी। गणेश स्थापना के मध्याह्न मुहूर्त को मुख्य पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए प्रतिमा को केवल रखकर मुख्य पूजा कई घंटे बाद करने के बजाय उपलब्ध मुहूर्त में आवश्यक पूजन कर्म पूरे करने की तैयारी रखें। संकल्प, आवाहन, मुख्य पूजन, दूर्वा, नैवेद्य और आरती जैसे कर्म अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा विधि के अनुसार किए जा सकते हैं। इसके बाद भजन, कथा और प्रसाद वितरण जैसे अन्य आयोजन जारी रखे जा सकते हैं।
बप्पा के आगमन से पहले कर लें ये तैयारी
गणपति के आगमन से पहले घर और पूजा स्थल की सफाई कर लें। चौकी, लाल या पीला वस्त्र, कलश, दीपक, दूर्वा, फूल, फल, मोदक, रोली, चंदन, अक्षत, मौली और आरती की सामग्री पहले से तैयार रखना सुविधाजनक रहेगा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक मिट्टी और पर्यावरण अनुकूल रंगों से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता देना भी बेहतर विकल्प हो सकता है।
दिल्ली और मुंबई में स्थापना मुहूर्त
दी गई जानकारी के अनुसार, दिल्ली में 14 सितंबर को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक और मुंबई में सुबह 11:20 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक गणपति स्थापना का मुहूर्त बताया गया है। ध्यान रखें कि स्थापना का समय स्थान और पंचांग के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना उचित रहेगा।
