अरब सागर में मिली नई ‘इंडियन डोरी’ मछली, भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजी गहरे समुद्र की दुर्लभ प्रजाति

अरब सागर में मिली नई ‘इंडियन डोरी’ मछली, भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजी गहरे समुद्र की दुर्लभ प्रजाति

भारत के समुद्री अनुसंधान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI) के वैज्ञानिकों ने केरल के कोल्लम तट के पास अरब सागर (पूर्वी लक्षद्वीप सागर) की गहराइयों में एक नई और दुर्लभ मछली प्रजाति की खोज की है। इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम Cyttopsis indica रखा गया है, जबकि इसे सामान्य रूप से ‘इंडियन डोरी’ (Indian Dory) कहा जा रहा है। यह खोज वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतीश कुमार आर. के नेतृत्व में कार्यरत विशेषज्ञ टीम ने की है।

350 से 500 मीटर गहराई में रहती है ‘इंडियन डोरी’

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मछली समुद्र की सतह से 350 से 500 मीटर की गहराई में निवास करती है, जहां सूर्य की रोशनी लगभग नहीं पहुंचती। ऐसे वातावरण में जीवित रहने के लिए इसकी शारीरिक बनावट बेहद खास है। इसका शरीर गहरे लाल और गुलाबी रंग का होता है, जबकि कम रोशनी में देखने के लिए इसकी आंखें सामान्य मछलियों की तुलना में काफी बड़ी होती हैं। इसके अलावा पंखों पर मौजूद गहरे काले धब्बे और धारियां इसे अपनी वंश की अन्य प्रजातियों से अलग पहचान देती हैं।

DNA परीक्षण से सामने आया बड़ा खुलासा

वैज्ञानिकों को इस मछली के छह नमूने केरल के शक्तिकुलंगरा मत्स्य बंदरगाह पर गहरे समुद्र में व्यावसायिक ट्रॉलिंग के दौरान मिले थे। शुरुआती जांच में इसे Cyttopsis rosacea प्रजाति का हिस्सा माना गया, लेकिन बाद में आधुनिक DNA विश्लेषण और पारंपरिक वर्गीकरण तकनीकों से पता चला कि यह पूरी तरह अलग और नई प्रजाति है। वैज्ञानिकों के अनुसार, Cyttopsis rosacea केवल अटलांटिक महासागर में पाई जाती है, जबकि अरब सागर में मिली यह मछली एक स्वतंत्र भारतीय प्रजाति है।

समुद्री पारिस्थितिकी के लिए अहम उपलब्धि

विशेषज्ञों का मानना है कि Indian Dory की खोज भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मौजूद गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को समझने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। यह खोज इस बात का संकेत भी देती है कि अरब सागर की गहराइयों में अब भी जैव विविधता का विशाल भंडार मौजूद है, जिस पर अभी व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन होना बाकी है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मछली गहरे समुद्र की खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह छोटे समुद्री जीवों का शिकार करती है और स्वयं बड़े समुद्री जीवों का भोजन बनती है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। इस खोज से भविष्य में गहरे समुद्र की जैव विविधता और समुद्री संरक्षण से जुड़े अनुसंधानों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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