छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री और बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने जिले में चल रहे विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐतिहासिक नगरी मल्हार और रतनपुर के समन्वित एवं सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने पर जोर दिया। जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में अरुण साव ने कहा कि विकास कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की देरी को स्वीकार नहीं करने की बात कही।
मल्हार और रतनपुर के विकास की बनेगी समग्र योजना
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मल्हार और रतनपुर की ऐतिहासिक विरासत को ध्यान में रखते हुए दोनों क्षेत्रों के विकास की समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए। इसमें पर्यटन की संभावनाओं, विरासत संरक्षण, अधोसंरचना और भविष्य की आवश्यकताओं को शामिल किया जाए। नगर विकास की समीक्षा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, अधोसंरचना विकास और साफ-सफाई से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बिलासपुर में आईएसडीपी योजना के तहत बनाए गए आवासों की आवश्यक मरम्मत कराकर पात्र गरीब परिवारों को जल्द आवंटित करने को भी कहा।
स्थानीय जरूरतों के आधार पर स्वीकृत हों विकास कार्य
जिला पंचायत की योजनाओं की समीक्षा करते हुए अरुण साव ने वीबी-जी रामजी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत फील्ड की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर कार्य स्वीकृत किए जाएं। उन्होंने मुक्तिधाम, शौचालय, स्कूलों की मरम्मत, जल संरक्षण और छोटे बांध जैसे स्थानीय जरूरत से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही गांवों में जल संरक्षण को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने और पानी बचाने के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने पर जोर दिया।
जल जीवन मिशन की भी हुई समीक्षा
बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति की जानकारी भी ली गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में 804 सिंगल विलेज योजनाओं में से 310 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इनमें 219 योजनाएं ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की जा चुकी हैं। अरुण साव ने योजनाओं के बेहतर संचालन और रखरखाव के लिए जनभागीदारी से जल अर्पण अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होंने वाटर रिचार्जिंग के लिए जिले में किए जा रहे जनभागीदारी के प्रयासों की सराहना भी की।
मलेरिया और मौसमी बीमारियों पर निगरानी के निर्देश
प्रभारी मंत्री ने जिले में मलेरिया समेत मौसमी बीमारियों की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने गांव स्तर तक लगातार निगरानी रखने और मितानिन स्तर पर जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल ने बताया कि कोटा विकासखंड में अब तक मलेरिया के 48 मरीज सामने आए हैं। इनमें छह मरीजों का उपचार जारी है, जबकि बाकी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। प्रभावित क्षेत्रों में रोटरी क्लब के सहयोग से 1500 मच्छरदानियां वितरित की जा रही हैं।
बिलासपुर में जलभराव के स्थायी समाधान पर जोर
अरुण साव ने बिलासपुर शहर में बारिश के दौरान सामने आने वाली जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए जिससे आने वाले वर्षों में शहरवासियों को जलभराव की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बारिश के दौरान सड़कों पर होने वाली क्षति और गड्ढों को लेकर भी अधिकारियों को पहले से तैयारी रखने को कहा, ताकि बारिश खत्म होते ही मरम्मत और सुधार कार्य शुरू किए जा सकें। उन्होंने निर्माण विभागों की अलग बैठक लेकर कार्यों की विस्तृत समीक्षा करने की बात कही।
बैठक से अनुपस्थित अधिकारियों को नोटिस
समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों पर भी अरुण साव ने नाराजगी जताई। उन्होंने बिल्हा, कोटा और तखतपुर जनपद पंचायत के सीईओ तथा रतनपुर नगरपालिका के सीएमओ को शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों से अपने विभागों की योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करने तथा मैदानी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। बैठक के बाद जिला अस्पताल की जीवनदीप समिति और शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की आयुष समिति की बैठक भी आयोजित की गई। इनमें स्वास्थ्य सुविधाओं और विकास कार्यों से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा हुई और कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
बैठक में विधायक धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला और दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, महापौर पूजा विधानी, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल समेत विभिन्न जनपद पंचायतों, नगरीय निकायों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
