टाटा ग्रुप में बड़ा संकट: चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा

टाटा ग्रुप में बड़ा संकट: चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा

टाटा संस बोर्ड में बढ़ी खींचतान, अगले साल फरवरी तक पद पर रहेंगे चंद्रशेखरन; अब नए चेयरमैन की तलाश शुरू होगी

मुंबई, 12 अगस्त 2026। टाटा ग्रुप में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अचानक इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे से टाटा ग्रुप के भीतर बोर्ड स्तर पर चल रहे मतभेद और खींचतान खुलकर सामने आ गई है।

चंद्रशेखरन ने अपने विस्तृत इस्तीफा पत्र में बोर्ड के भीतर पैदा हुए मतभेदों का जिक्र किया है। इनमें टाटा ग्रुप की कुछ कंपनियों, खासकर एयर इंडिया में हो रहे भारी घाटे, को लेकर चिंताएं प्रमुख बताई गई हैं।

हालांकि, चंद्रशेखरन तत्काल पद से अलग नहीं होंगे। वह फरवरी 2027 तक टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे, जब उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होगा। इसके बाद ग्रुप नए चेयरमैन की तलाश करेगा। इसके लिए आंतरिक और बाहरी दोनों नामों पर विचार किए जाने की संभावना है।

अगले कार्यकाल को लेकर बोर्ड में नहीं बनी सहमति

चंद्रशेखरन के इस्तीफे का घटनाक्रम कुछ दिन पहले हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक से जुड़ा है। उनके कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया था।

अपने इस्तीफा पत्र में चंद्रशेखरन ने बताया कि 24 फरवरी की बोर्ड बैठक में श्री दोराबजी टाटा ट्रस्ट और रतन टाटा ट्रस्ट दोनों ने उनके कार्यकाल को पांच साल और बढ़ाने की सिफारिश की थी।

हालांकि, बोर्ड के एक सदस्य ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। चंद्रशेखरन ने अपने पत्र में कहा कि सर्वसम्मति नहीं होने की स्थिति में उन्होंने इस फैसले को टालना उचित समझा।

रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड के चार सदस्य उनके कार्यकाल के विस्तार के पक्ष में थे, लेकिन एक सदस्य के विरोध के कारण फैसला नहीं हो सका।

चंद्रशेखरन ने यह भी कहा कि बोर्ड की उस बैठक को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इस मुद्दे पर कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

नोएल टाटा की भूमिका चर्चा में

चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार का विरोध नोएल टाटा की ओर से होने की बात कही जा रही है। नोएल टाटा कई टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन हैं और टाइटन तथा टाटा स्टील के वाइस-चेयरमैन भी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नोएल टाटा ने टाटा ग्रुप की कुछ कंपनियों में हो रहे भारी घाटे को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। इनमें सबसे प्रमुख नाम एयर इंडिया का है।

एयर इंडिया को पिछले वित्त वर्ष में ₹22,238 करोड़ का घाटा

टाटा ग्रुप ने करीब पांच साल पहले एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था। लेकिन एयरलाइन को अब तक बड़े वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया को पिछले वित्त वर्ष में ₹22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि इससे पिछले साल यह घाटा ₹10,859 करोड़ था।

एविएशन सेक्टर पर खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ती ईंधन कीमतों का भी असर पड़ा है। चंद्रशेखरन ने कुछ दिन पहले संकेत दिया था कि एयर इंडिया को पूरी तरह पटरी पर लाने में एक दशक तक का समय लग सकता है।

एयर इंडिया के विलय को लेकर भी सवाल

एयर इंडिया के संचालन को लेकर टाटा ग्रुप की रणनीति पर भी सवाल उठे हैं। ग्रुप ने एयर इंडिया, विस्तारा और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विलय की प्रक्रिया को एक साथ आगे बढ़ाया।

विश्लेषकों के मुताबिक, यह प्रक्रिया काफी जटिल रही है। इससे पहले एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के विलय का अनुभव भी चुनौतीपूर्ण रहा था।

टाटा डिजिटल को भी भारी नुकसान

टाटा ग्रुप की एक अन्य कंपनी टाटा डिजिटल को भी बड़े घाटे का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, टाटा डिजिटल का घाटा ₹4,974 करोड़ तक पहुंच गया है।

टाटा डिजिटल लंबे समय से एक बड़े डिजिटल सुपर-ऐप के निर्माण की दिशा में काम कर रहा है।

इस्तीफे के बाद शेयर बाजार में असर

चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद टाटा ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर करीब 6 फीसदी तक गिर गए। यह दो महीने से ज्यादा समय में कंपनी की सबसे बड़ी एक-दिन की गिरावट बताई गई। वहीं टाटा मोटर्स करीब 4 फीसदी और टाटा स्टील करीब 2 फीसदी नीचे आए।

इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफे को लेकर चिंता जताई है।

टाटा संस के भविष्य और IPO पर भी सवाल

टाटा ग्रुप के सामने केवल कंपनियों के प्रदर्शन का मुद्दा ही नहीं है। टाटा संस को भविष्य में सार्वजनिक करने यानी IPO लाने की संभावना भी एक महत्वपूर्ण विषय है।

इसके अलावा टाटा ग्रुप और शापूरजी पालोनजी ग्रुप के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद भी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप टाटा संस में एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक शेयरधारक है।

चंद्रशेखरन के जाने के बाद इन सभी मुद्दों को संभालने की जिम्मेदारी टाटा ट्रस्ट और नए नेतृत्व पर होगी।

सेमीकंडक्टर समेत बड़े प्रोजेक्ट भी दांव पर

टाटा ग्रुप इस समय सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग समेत कई बड़े प्रोजेक्ट्स में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। केंद्र सरकार भी देश में घरेलू टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।

चंद्रशेखरन ने अपने इस्तीफा पत्र में भी कहा कि ग्रुप के कई रणनीतिक प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण चरण में हैं और फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व संभालने के लिए समय रहते किसी नेता की नियुक्ति जरूरी है।

विजय सिंह ने भी छोड़ा ट्रस्ट का पद

चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी विजय सिंह ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

विजय सिंह पूर्व रक्षा सचिव रह चुके हैं और लंबे समय से टाटा ग्रुप से जुड़े रहे हैं।

टाटा ग्रुप में चंद्रशेखरन का सफर

एन. चंद्रशेखरन का टाटा ग्रुप में सफर करीब चार दशक पुराना है। उन्होंने अपने इस्तीफा पत्र में लिखा कि उन्होंने टाटा ग्रुप में 40 साल का पेशेवर जीवन पूरा किया है।

उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को एक वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद 2017 में रतन टाटा ने उन्हें पूरे टाटा ग्रुप की कमान सौंपी।

वह टाटा परिवार से बाहर के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाया गया था।

उनके नेतृत्व में TCS, जगुआर लैंड रोवर समेत टाटा ग्रुप की कई सूचीबद्ध कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया।

अब उनके इस्तीफे के बाद टाटा ग्रुप के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए नेतृत्व का चयन, एयर इंडिया और अन्य घाटे में चल रही कंपनियों को पटरी पर लाना तथा सेमीकंडक्टर जैसे बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *