सदियों बाद भी स्टैटिक बिजली रहस्य…

सदियों बाद भी स्टैटिक बिजली रहस्य…

कभी गुब्बारे को बालों पर रगड़ने के बाद बालों का खड़ा होना, कपड़ों का आपस में चिपकना या किसी धातु को छूते ही हल्का झटका लगना—ये सभी स्थैतिक बिजली (Static Electricity) के सामान्य उदाहरण हैं। विज्ञान लंबे समय से इस घटना का अध्ययन कर रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वैज्ञानिक आज भी इसके मूल तंत्र को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।

हालांकि शोध और वैज्ञानिक प्रयोगों ने स्थैतिक बिजली से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण संकेत जरूर दिए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अलग-अलग पदार्थों के संपर्क में आने पर चार्ज के आदान-प्रदान में कई ऐसे कारक भूमिका निभाते हैं, जिन्हें पहले पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया था।

आखिर स्थैतिक बिजली कैसे बनती है?

जब दो वस्तुएं एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं या रगड़ती हैं, तो उनके बीच विद्युत आवेश का आदान-प्रदान हो सकता है। इस प्रक्रिया को ट्राइबोइलेक्ट्रिसिटी (Triboelectricity) कहा जाता है।

इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉन और अन्य आवेशित कण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सामान्य स्थिति में किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन की संख्या का संतुलन होता है, लेकिन संपर्क या घर्षण के बाद यह संतुलन बदल सकता है।

उदाहरण के तौर पर गुब्बारे को बालों पर रगड़ने पर गुब्बारा सामान्यतः नकारात्मक आवेश हासिल करता है, जबकि बाल सकारात्मक रूप से आवेशित हो जाते हैं। विपरीत आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और इसी वजह से बाल गुब्बारे से चिपक जाते हैं।

वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल क्या है?

समस्या तब शुरू होती है जब वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर संपर्क के दौरान वास्तव में क्या ट्रांसफर होता है। संभव है कि एक वस्तु से दूसरी वस्तु में इलेक्ट्रॉन जाएं। लेकिन कुछ परिस्थितियों में आयन या बड़े आवेशित कण भी भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि स्थैतिक बिजली के लिए कोई एक सरल और सार्वभौमिक व्याख्या अभी तक सामने नहीं आई है।

वैज्ञानिकों ने अलग-अलग पदार्थों के चार्ज होने की प्रवृत्ति को समझने के लिए ट्राइबोइलेक्ट्रिक सीरीज भी बनाई है। हालांकि, अलग-अलग प्रयोगों में इस सूची के परिणाम हमेशा एक जैसे नहीं मिलते।

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एक जैसे पदार्थ भी अलग तरह से चार्ज क्यों होते हैं?

हाल के प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने एक और हैरान करने वाली बात देखी। एक ही पदार्थ से बने समान दिखने वाले कांच के कण जब एक ही प्लेट से टकराए, तो कुछ कण लगातार सकारात्मक और कुछ लगातार नकारात्मक चार्ज हासिल करते रहे।

इससे सवाल उठा कि जब दोनों कण और प्लेट एक ही सामग्री से बने हैं, तो उनके व्यवहार में अंतर क्यों है?

इसका एक महत्वपूर्ण सुराग पदार्थ की सतह पर मौजूद बेहद पतली परत से मिला।

सतह पर मौजूद ‘गंदगी’ भी बदल सकती है चार्जिंग

शोधकर्ताओं ने कांच के छोटे कणों को लगभग 200 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करके साफ किया। इसके बाद उनके चार्ज होने के व्यवहार में बदलाव देखा गया।

करीबी जांच में पता चला कि सफाई की प्रक्रिया ने सतह पर मौजूद कार्बन आधारित यौगिकों को हटा दिया था। ये पदार्थ वातावरण से वस्तुओं की सतह पर जमा हो सकते हैं।

इससे वैज्ञानिकों को संकेत मिला कि किसी वस्तु की सतह पर मौजूद बेहद छोटी मात्रा की सामग्री भी यह तय करने में भूमिका निभा सकती है कि वह संपर्क के बाद किस तरह चार्ज होगी।

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